माधोटांडा। शारदा सागर डैम से मछलियों का अवैध शिकार विभाग के कर्मचारी और अधिकारी नहीं रोक पा रहे हैं। पेट्रोलिंग की व्यवस्था न होने और ई-टेंडरिंग प्रक्रिया की लेटलतीफी से शिकारियों की बल्ले-बल्ले है। जबकि ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया अगस्त माह तक पूरी हो जानी चाहिए थी।
यह पहला मौका हैं जब 22 किमी लंबे शारदा डैम में मछली पकड़ने का ठेका अभी तक नहीं हो सका है। जबकि यह ठेका हर साल सवा करोड़ रुपये सालाना से अधिक नीलामी बोली पर छूटता था। यह ठेका तीन साल के लिए होता था। इसलिए ठेकेदार को हर साल नीलामी की रकम का दस प्रतिशत अधिक जमा करना पड़ता था और साथ ही मछली का बच्चा भी हर साल छोड़ना पड़ता था। इस वर्ष मत्स्य निगम द्वारा मछली नीलामी की ई-टेंडरिंग व्यवस्था की लेटलतीफी के कारण ठेका अभी तक नहीं हो सका है। जलाशय प्रभारी श्यामलाल बताते हैं कि ई टेंडरिंग की कार्रवाई के लिए नीलामी की फाइल शासन स्तर पर भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक कोई आदेश न मिलने के कारण ठेका नहीं हो सका।
जहां बंगाली कालोनियों के शिकारी सांठगांठ कर धंधे को अंजाम देने में जुटे हैं, वहीं एक कालोनी शारदा डैम के 18 से 22 किलोमीटर के मध्य बस गई है। कालोनी के शिकारी छोटी-छोटी नावों से मछली शिकार को अंजाम दे रहे हैं। यहां मत्स्य निगम की कोई भी टीम तैनात नहीं है, जो पेट्रोलिंग कर अवैध शिकार को रोक सके। मत्स्य निगम के जलाशय प्रभारी श्यामलाल यहां तैनात हैं। उन्होंने बताया कि मछली का शिकार रोकने के लिए जब डैम में मछली का नीलामी ठेका हो जाता था, तो ठेकादार के सुरक्षाकर्मी अवैध शिकार रोकने को नाव से पेट्रोलिंग करते थे, लेकिन अब ई टेंडरिंग की समस्या हल न होने के चलते ठेका नहीं हो सका। बताते हैं कि मारी गई मछलियां रोजाना उत्तराखंड समेत अन्य नगरों में सप्लाई की जा रही हैं।