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ॉ्मदाह की चेतावनी को लेकर चौकन्ना रहा पुलिस, प्रशासन

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पूरनपुर/पीलीभीत। पट्टे की भूमि पर कब्जा न मिलने के विरोध में गांव डूडा कालोनी निवासी रामनरेश गौड़ की ओर से तहसील दिवस में आत्मदाह की दी गई चेतावनी को लेकर पुलिस, प्रशासन मंगलवार को चौकन्ना रहा। तहसील में पुलिस फोर्स के अलावा अन्य इंतजाम किए गए। घंटों पुलिस और प्रशासन आत्मदाह की चेतावनी देने वाले रामनरेश गौड़ को ढूंढता रहा, लेकिन रामनरेश नहीं मिले। तहसील पहुंचे रामनरेश के पुत्र रामलखन ने बताया कि उसके पिता 25 जुलाई को तहसील आए थे। इसके बाद घर नहीं लौटे।
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गांव डूडा कालोनी निवासी रामनरेश गौड़ ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में पट्टे की भूमि पर कब्जा न मिलने, अफसरों पर भूमाफियाओं से मिलकर उनको भूमि जुतवा देने आदि का आरोप लगाया था। पत्र में पट्टे की भूमि पर कब्जा न मिलने पर तहसील दिवस में दो अगस्त को आत्मदाह की चेतावनी दी गई थी। चूंकि तहसील दिवस मंगलवार को था। इसको लेकर कहीं रामनरेश आत्मदाह चेतावनी भरे पत्र में गलत तारीख तो नहीं डाल गया आदि को लेकर पुलिस प्रशासन चौकन्ना रहा। तहसील परिसर में इंस्पेक्टर जयवीर सिंह फोर्स के साथ मौजूद रहे। रामनरेश के पुत्र और गांव के कई लोगों को प्रशासन ने तहसील परिसर में एकत्र किया था। ताकि रामनरेश की पहचान हो सके। फायर ब्रिगेड की टीम के अलावा एंबुलेंस भी तहसील परिसर में मौजूद रही। अपराह्न करीब तीन बजे तक रामनरेश गौड़ के तहसील न पहुंचने पर पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली।
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आठ दिन से लापता है रामनरेश
पूरनपुर। तहसील कार्यालय पहुंचे रामनरेश के सबसे छोटे पुत्र रामलखन ने बताया कि पिता उसके साथ 25 जुलाई को तहसील कार्यालय आए थे। पिता को तहसील गेट पर छोड़कर बच्चे की किताबें खरीदने चला गया। वापस तहसील पहुंचने पर उसके पिता ने उसके साथ घर जाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद सुराग नहीं लगा।
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मौके पर भूमि नहीं और कर दिया गया था छह एकड़ का पट्टा
अमर उजाला ब्यूरो
पूरनपुर। भूदान समिति की ओर से रामनरेश गौड़ को करीब डेढ़ पखवाड़ा पहले छह एकड़ कृषि भूमि का पट्टा हुआ था। राजस्व अभिलेखों में दाखिल खारिज भी हो गया, लेकिन मौके पर भूमि एक एकड़ सात डिस्मिल ही थी। पट्टा और दाखिल खारिज होने के बाद रामनरेश पूरी भूमि पर कब्जा दिलवाने की मांग कर रहा था।
गाटा संख्या 11,12 और तेरह में क्रमश: 185, बीस और 51 एअर भूमि है। इसमें कुछ अन्य लोगों को भी पट्टा के साथ रामनरेश को भी करीब छह एकड़ का पट्टा किया था, लेकिन उक्त भूमि पर काबिज लोगों को छोड़कर मात्र एक एकड़ सात डिस्मिल भूमि खाली थी। पर्याप्त भूमि न होने पर पट्टा कुछ दिन बाद खारिज हो गया। रामनरेश ने कोर्ट की शरण ली और तब से पट्टे की पूरी भूमि पर कब्जा की मांग कर रहा था। इधर, अब दाखिल खारिज को निरस्त करने की कार्रवाई राजस्व प्रशासन ने शुरू की है। तहसीलदार कुंवर बहादुर सिंह ने बताया कि रामनरेश की पट्टे की भूमि का दाखिल खारिज अब निरस्त किया जाएगा।
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