बागपत। सीएचसी बागपत में रोटा वायरल से बचाव के लिए बच्चों को दवा पिलाई गई। इससे बचाव के बारे में बताया। कोर एडरा डीएमसी फंसी उर रहमान और मंजू शर्मा ने बताया कि इससे रोटा वायरल बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। इससे बचने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर दवा पिलाई गई है।
खेकड़ा नगर में स्थित सीएचसी पर बुधवार को बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए रोटा वायरस टीकाकरण का शुभारंभ क्षेत्रीय विधायक योगेश धामा ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सरकार को पूरा विश्वास है कि इस टीके की मदद से नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में निश्चित ही कमी आएगी। सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा ने कहा कि रोटा वायरस की वजह से बच्चे डायरिया का शिकार होते हैं और कई मामलों में उनकी मौत भी हो जाती है। खुशी की बात यह है कि रोटा वायरस टीके को नियमित प्रतिरक्षण टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया है । उससे बच्चों को इस खतरनाक विषाणु से बचाया जा सकता है । जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज त्यागी ने बताया कि अब उत्तर प्रदेश देश का 11 वां ऐसा राज्य हो गया है, जो इस टीके से बच्चों को रोटा वायरस से पूर्ण प्रतिरक्षित करेगा। यह टीका पहली बार देश के सामान्य प्रतिरक्षण कार्यक्रम में 2016 में उड़ीसा में शुरू किया। इसके बाद हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, असम, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, झारखंड एवं त्रिपुरा में टीकाकरण की शुरूआत की। इस दौरान सीएचसी अधीक्षक डॉ. अरविंद मलिक, डॉ. प्रियंका, डॉ. मीना, डॉ. प्रगति, डीईओ सचिन शर्मा, धर्मेंद्र सिंह, पुष्पा पटेल, सुशील बाला आदि कर्मी मौजूद रहे।
बड़ौत के नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पठानकोट परिसर में बुधवार को रोटा वायरस का वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि नगरपालिका परिषद चेयरमैन अमित राणा, सीएचसी अधीक्षक डॉ. एएसके मलिक और ब्लाक कार्यक्रम प्रबंधक सचिन मलिक ने संयुक्त रूप से किया। अमित राणा ने लोगों को प्रदेश सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी और उनका लाभ उठाने का आह्वान किया।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. एएसके मलिक ने बताया कि भारत सरकार द्वारा उप्र में भी बुधवार से रोटा वायरस वैक्सीन के टीके लगाने का शुभारंभ हो चुका है। यह टीका छह सप्ताह, 10 सप्ताह व 14 सप्ताह पर पेंटा बेलेंट वैक्सीन के साथ दिया जाएगा। इस समय सरकार द्वारा नौ जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाए जाएंगे। इसमें टीबी, टीटनेस, पोलियो, निमोनिया, खसरा, काली खांसी, हेपेटाइटिस बी, गलघोटू, गंभीर दस्त आदि हैं। इसमें एलएचवी कमला राठी, एएनएम कुसुमलता, सुभाष, बीएमसी सुषमा, बीएमसी देवपाल का योगदान रहा।