अमरिया और जहानाबाद क्षेत्र में नहीं थम रही चहलकदमी
पीलीभीत। अमरिया क्षेत्र में घूम रहे बाघ की दहशत कायम है। पैरी फार्म के निकट देवहा नदी किनारे और जहानाबाद क्षेत्र के गौनेरीवदी गांव में बाघ के पगचिह्न मिले हैं।
अमरिया क्षेत्र में खुले में घूम रहे बाघों की चहल कदमी खेती पर भारी पड़ती जा रही है। आए दिन खेतों अथवा इसके आसपास बाघ दिखने से खेती के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। शुक्रवार को सुबह निगरानी को निकली वन विभाग की टीम को अमरिया क्षेत्र में पैरीफार्म में देवहा नदी के किनारे बाघ के पगचिह्न मिले। वनविभाग की टीम ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर सतर्क रहने के निर्देश दिए साथ ही मुख्यमंत्री वृक्ष धन योजना के बारे में जानकारी देकर किसानों से पंजीकरण कराने का आह्वान किया।
जहानाबाद। ललौरीखेड़ा ब्लॉक के ग्राम गौनेरी वदी में उमाचरन पुत्र मेवाराम के गेहूं के खेत में बाघ के पगचिह्न प्राप्त हुए। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने पगचिह्न ट्रेस किए। वनक्षेत्राधिकारी सतेंद्र चौधरी ने बताया कि अमरिया क्षेत्र मेें घूम रहे बाघों की नियमित निगरानी की जा रही है। इसके अतिरिक्त भी कहीं से सूचना आने पर टीम को भेजा जाकर जांच कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि जगदीशपुर गांव में भी गोष्ठी का आयोजन कर लोगों को बाघ से बचाव एवं मुख्यमंत्री वृक्षधन योजना के बारे में जानकारी दी।
दियोरिया रेंज में महिला की मौत का मामला
पीलीभीत। टाइगर रिजर्व की दियोरिया रेंज में बाघ के हमले में महिला की मौत के मामले में टाइगर रिजर्व प्रशासन ने शासन को रिपोर्ट भेजने की तैयारी कर रहा है। वहीं पोस्टमार्टम के बाद शाम को महिला का अंतिम संस्कार कर दिया।
दियोरिया रेंज में बृहस्पतिवार को गांव पिपरिया दियोहना की 55 वर्षीय महिला कैलाशो देवी का शव मिला था। महिला पिछले करीब छह दिन से गायब थी। वनविभाग के अनुसार महिला जंगल से लकड़ी लेने गई थी। माना जा रहा है इस दौरान बाघ ने उसे अपना निवाला बना लिया। दोपहर बाद सूचना मिलने के चलते पुलिस ने शव कब्जे में लेकर जिला मुख्यालय भेजा लेकिन देरी हो जाने के चलते पोस्टमार्टम नहीं हो पाया था। शुक्रवार को पोस्टमार्टम होने के बाद पुलिस ने शव घर वालों को सौंप दिया। शाम को महिला का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इधर वनविभाग के स्टाफ ने भी महिला की मौत की रिपोर्ट तैयार कर ली है। डीएफओ के बाहर होने के चलते रिपोर्ट शासन को नहीं भेजी जा सकी है। उधर गांव में बाघ की दहशत दूसरे दिन भी कायम है। आसपास गांव के लोग शाम होने से पहले ही खेतों से काम निबटा कर लौट गए।