फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भूलकर भी न जाना बस स्टैंड के शौचालय में

विज्ञापन
बदहाल पड़े मूत्रालय। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
पीलीभीत। शहर के रोडवेज बस स्टैंड से अगर कभी आपको गुजरना पड़े तो कभी भूलकर भी यहां का शौचालय इस्तेमाल न करना। बस स्टैंड में यात्री सुविधाओं के नाम रोडवेज प्रशासन जनता से धोखा कर रही है। बस स्टैंड का एक भी शौचालय साफ नहीं है। लंबे समय से रोडवेज बस स्टैंड पर बने बदहाल शौचालयों की साफ-सफाई नहीं होने के कारण ये गंदगी से पटे पड़े हैं। ऐसी स्थिति में यहां आने वाले यात्रियों को आवश्यक सुविधाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं जिम्मेदार एआरएम कहते है कि यात्रियों की संख्या कम रहती हैं इसलिए शौचालय की जरूरत नहीं है, जबकि शौचालयों की बदहाल स्थिति से सबसे अधिक परेशानी महिला यात्रियों को होती हैं। उनको शर्मसार होना पड़ता हैं। गंदगी इतनी है कि पुरुष और महिला शौचालय में एक बार चले गए तो बीमार हो जाओगे। यहीं नहीं बस स्टैंड परिसर में चारों तरफ गंदगी का आलम है।
विज्ञापन

---
एनाउंसमेंट भी नहीं होता
यात्री राजवती ने बताया कि बिजनौर से आई है और पूरनपुर जाना है। बस के इंतजार में एक घंटे से बैठी हूं। डिपो में कोई एनाउंसमेंट नहीं होता। अब तक पता नहीं कि बस कब आएगी। बसों के आने-जाने की सूचना मिलती रहनी चाहिए, ताकि यात्रियों को सुविधा हो।
-----
पीने के पानी की नहीं उचित व्यवस्था
कहने को रोडवेज बस स्टैंड में तीन से चार जगह पानी की टंकियां लगी हुईं हैं, ताकि यहां पहुंचने वाले यात्रियों को कुछ राहत मिल सके, लेकिन यह सब भी बदहाल है। स्थानीय कर्मचारी बताते हैं कि महीनों से टंकी में पानी नहीं आता। बस स्टैंड पर सिर्फ एक सरकारी हैंडपंप लगा है। ऐसे में यात्रियों को पीने के पानी की अव्यवस्था से रोजाना जूझना पड़ता हैं।
विज्ञापन

--
एक जगह भी इमरजेंसी नंबर नहीं
रोडवेज बस स्टैंड पर एक जगह भी इमरजेंसी हेल्प लाइन नंबर नहीं लिखा है। बस स्टैंड पर न तो महिला हेल्प लाइन नंबर है न ही एंबुलेंस सेवा के लिए नंबर अंकित किए गए हैं। सवाल ये है कि अगर कोई वारदात हो जाए तो बस स्टैंड में महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी। जिम्मेदार अधिकारी भी इसके प्रति संजीदा नहीं दिखते।
--
यात्री शेड को बना दिया कूड़ा घर
रोडवेज बस स्टैंड पर यात्रियों के बैठने की सुविधा के लिए बना यात्री शेड में गंदगी का अंबार लगा है। यात्री शेड सिर्फ नाम का है। यहां दीवारें गुटखे की पीक से लाल है। कुछ कर्मचारी तो अपनी बाइक भी यात्री शेड में खड़ी करते है। पूछने पर एक कर्मचारी ने बताया कि पिछले चार महीने से यह तो कोई सफाई कर्मचारी दिखा नहीं है। पहले आता होगा तो पता नहीं।
---
जिम्मेदार एआरएम की सुनें
एआरएम सुनील कुमार नागर को शौचालयों की बदहाल स्थिति नहीं दिखती। वह शौचालयों को ठीक कराने के बजाए तर्क देते दिखे। उनका कहना था कि डिपो में तीन से चार शौचालय बनाने की जरूरत नहीं थी। यात्रियों की संख्या कम है इसलिए शौचालय नहीं होते तो भी काम चल सकता था। शौचालयों की साफ सफाई के लिए कार्यदायी संस्था से बात की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें