पीलीभीत। शहर का उपाधि महाविद्यालय इन दिनों अव्यवस्थाओं का प्रतीक बन गया है। 1980 के दशक में बने भवन अब छात्रों की बढ़ती संख्या का बोझ झेलने में असमर्थ है। महाविद्यालय में वर्तमान समय में 2749 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन पढ़ाई के लिए न तो पर्याप्त कक्षाएं हैं और न ही शिक्षक। नतीजतन छात्र-छात्राओं को शिक्षा पाने के लिए रोजाना जद्दोजहद करनी पड़ती है।
महाविद्यालय में अध्ययन के लिए स्वीकृत 32 कक्षाओं में से सिर्फ 17 ही उपलब्ध हैं। सीमित स्थान के चलते कक्षाओं को चरणबद्ध ढंग से चलाना पड़ता है। विद्यार्थी बताते हैं कि कई बार उन्हें घंटों इंतजार के बाद क्लास मिलती है, तो कभी भीड़भाड़ वाले हालात में पढ़ाई करनी पड़ती है। इस कारण शिक्षा की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
शिक्षकों की स्थिति भी बेहद खराब है। बीए और बीकॉम में 26 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 10 शिक्षक कार्यरत हैं। वहीं विज्ञान में स्वीकृत 10 शिक्षक में छह की वर्तमान में तैनाती है। कम स्टाफ होने से शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव है। उन्हें एक साथ कई बैच संभालने पड़ते हैं, इससे वे छात्रों को अपेक्षित समय और ध्यान नहीं दे पा रहे। महाविद्यालय में बीए, बीकॉम, बीएससी, एमए, एम कॉम समेत कोर्स उपलब्ध हैं।
मुख्य समस्या
- कक्षाओं का अभाव
- शिक्षकों की भारी कमी
- पठन-पाठन की गुणवत्ता प्रभावित
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लंबे समय से उठा रहे आवाज, नहीं हुआ सुधार
महाविद्यालय के छात्रों का कहना है कि लंबे समय से भवन और स्टाफ की कमी को लेकर आवाज उठा रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों को पढ़ाने के लिए सुविधाओं का अभाव शिक्षा के स्तर को गिरा रहे हैं। ऐसे में इस कॉलेज की दशा सुधारी जाए। इस दिशा में कदम उठाए जाने जरूरी है। उनका कहना है कि कॉलेज शहर के युवाओं के भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ा है।
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वर्जन
कॉलेज में अध्ययन के लिए कक्षाओं की कमी है। सापेक्ष पद में स्टाफ भी कम है। इसको लेकर लगातार पत्राचार किए जा रहे हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था बेहतर हो सके। - डॉ दुष्यंत कुमार, प्राचार्य, उपाधि महाविद्यालय