दो दशक बाद शारदा ने फिर धुरिया पलिया को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। नदी इस गांव के समीप स्थित बिजौरी खुर्दकलां के जंगल का कटान करते हुए गांव की ओर बढञ गई है। 48 घंटे के भीतर नदी यहां दस से अधिक किसानों की करीब 50 एकड़ कृषि भूमि मय लहलहाती फसलों के अपने आगोश में ले चुकी है। शारदा की इस तबाही से इलाके के ग्रामीण भयभीत हैं, लेकिन अभी तक इनका हाल जानने न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी पहुंचा हैं और न ही बाढ़ खंड का कोई अधिकारी। कटान रोकने को यहां बचाव कार्य भी शुरू नहीं करा जा रहा है। गांव के लोग बताते हैं कि 20 साल पहले भी यहां नदी कटान कर चुकी है। उस समय भी किसानों की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि नदी में समा गई थी। बाद में नदी की धार दूर चले जाने पर किसान फिर खेती करने लगे थे।
करीब दस दिन पहले पहाड़ों पर हुई बारिश व बनबसा बैराज द्वारा शारदा में छोड़े गए 2.30 लाख क्यूसेक पानी के बाद से उफनाई शारदा ने कुछ स्थानों पर अपना रुख बदल लिया है। नदी के घटते बढ़ते जल स्तर के चलते माधोटांडा क्षेत्र के रमनगरा क्षेत्र व ट्रांस शारदा क्षेत्र के राणा प्रताप नगर क्षेत्र में कटान भी जारी है। खास बाद यह है कि शारदा ने रमनगरा बुझिया क्षेत्र में ठोकरों के साथ टाइगर रिजर्व के बिजौरी खुर्दकलां जंगल में भी कटान शुरू कर दिया है। अब नदी ने बिजौरी खुर्द के डाउनस्ट्रीम में धुरिया पलिया गांव की कृषि भूमि को भी निगलना शुरू कर दिया है। कटान के चलते यहां बीते 48 घंटे के भीतर धान, सोयाबीन, गन्ना व केले की खड़ी फसल को अपना निशाना बना रही है। ग्राम प्रधान सत्यनारायण के मुताबिक सेवा सिंह, रतन बैरागी, अजीत सिंह, राम कुमार, कमलाकर सिंह, गुरमुख सिंह समेत दस से अधिक किसानों की करीब 50 एकड़ भूमि मय लहलहाती फसलों के यहां नदी की भेंट चढ़ चुकी है।
बाढ़ खंड के अभियंता भी नहीं पहुंचे
ग्राम प्रधान सत्यनारायण ने बताया कि भू-कटान होने की जानकारी लेखपाल को दी गई, लेकिन कोई राजस्व कर्मी यहां नहीं आया। खास बात यह है कि कटान होने के बावजूद बाढ़ खंड का भी कोई अभियंता यहां झांकने नहीं आया। जबकि इस इलाके में सर्वाधिक कटान पिछले साल हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि कुछ बाढ़ नियंत्रण कार्य जंगल से सटे इलाके से धुरिया पलिया तक करा दिए जातेे तो भू-कटान नहीं होता, लेकिन बाढ़ खंड ने यहां पर कोई अस्थाई बाढ़ नियंत्रण कार्य कराना मुनासिब नहीं समझा। जिसका खामियाजा किसानों को अपनी कृषि फसलें व भूमि गंवा कर भुगतना पड़ रहा है।
बीस साल पहले भी धुरिया पलिया में हुई थी भारी तबाही
इस इलाके में जब गत वर्षों में बिजौरी खुर्द के जंगल को शारदा ने अपना निशाना बनाया और बड़े पैमाने पर पेड़ बहकर नदी के बाएं किनारे की ओर जा लगे थे, तब नदी ने चंदपुरा जंगल में भी कटान शुरू कर दिया था। जिसके चलते दाएं किनारे की ओर धुरिया पलिया क्षेत्र में भारी तबाही हुई थी। सैकड़ों एकड़ भूमि शारदा की भेंट चढ़ गई थी और नदी कटान कर धुरिया पलिया मार्ग तक पहुंच गई थी। उस समय माना जा रहा था कि मझारा बघा व वीरखेड़ा में भी कटान हो सकता है, लेकिन बाढ़ के अंतिम दिनों में शारदा ने एक बार पुन: इस पूरे इलाके में रेत के ढेर छोड़ दिए थे। जिससे नदी दूर चली गई थी। बाद में किसानों ने नदी की छोड़ी अपनी जमीन में फिर खेती करने लगे थे। अब एक बार फिर कटान के चलते यहां के ग्रामीण किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
बुझिया के भू-कटान का असर धुरिया पलिया में
जानकारों के मुताबिक जब ठोकरों पर नदी की मुख्य धार का असर होता है तो डाउनस्ट्रीम में नदी कम से कम 200 मीटर तक इलाका सुरक्षित छोड़ती है। रमनगरा बुझिया में भी नदी ने रेत छोड़ी थी। हालांकि उसके बाद नदी ने बिजौरी खुर्द के जंगल में भू-कटान शुरू कर दिया था। नदी के बाएं किनारे पर बहकर आए पेड़ों के चलते ही धुरिया पलिया में दाहिने किनारे की ओर भूटान बढ़ गया। यदि हालात ऐसे ही रहे तो नदी इस इलाके में अभी और तेजी से भू-कटान कर सकती है।