अविरल धारा को भूलकर सिर्फ सुंदरीकरण में लगा प्रशासन
पहले भी कई प्रयास हो चुके हैं विफल
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा/पीलीभीत।
गोमती नदी पर अविरल धारा बहाने के अभियान की शुरूआत काफी जोर शोर से हुई थी। मुख्यमंत्री के आगमन की जानकारी होने पर नालों के माध्यम से आननफानन में पानी भी उद्गम स्थल तक पहुंच गया, लेकिन सीएम के न आने से प्रशासन ने अविरल धारा बहाने की कवायद को अधर में छोड़ दिया। अब यह सिर्फ गोमती उद्गम स्थल के सुंदरीकरण एवं निर्माण कार्यों तक सीमित रह गया है। इससे क्षेत्र के लोगों में मायूसी छाने लगी है।
माधोटांडा स्थित फुलहर झील से निकली गोमती मृत प्राय अवस्था में पहुंच चुकी थी। इसे पुनर्जीवित करने के लिए करीब दो माह पूर्व 10 मार्च को पीलीभीत में जलपुरूष डा. राजेंद्र सिंह की मौजूदगी में हुई कार्यशाला के बाद अभियान के रूप में लिया गया था और इसी के तहत दो अप्रैल को डीएम डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा ने फावड़ा चलाकर गोमती नदी क्षेत्र में खुदाई का शुभारंभ किया था। गोमती में अविरल धारा बहाने को शुरू हुए इस अभियान से लोगों को उम्मीद जगी थी और बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़े थे। प्रारंभ में नदी क्षेत्र की खुदाई के साथ गोमती उद्गम स्थल की झील को पानी देने के लिए देवीपुर माइनर से नाला भी खोद गया। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री के आने की संभावनाओं को देखते हुए आननफानन में देवीपुर माइनर एवं सपा शासन में 2.25 करोड़ से खोदे गए नाले से उद्गम स्थल तक पानी पहुंचने का प्रयास भी किया गया, लेकिन मुख्यमंत्री केे आने का कार्यक्रम निरस्त होने के बाद से अविरल धारा बहाने की दिशा में चल रहा कार्य ठप हो गया। हालांकि उद्गम स्थल के सुंदरीकरण के कार्य चल रहे हैं। मंच बनने के बाद अब पार्किंग स्थल, बैठने के लिए पार्क आदि के निर्माण चल रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी लखनऊ विश्वविद्यालय से पहुंची टीम गोमती मां की प्रतिमा के निर्माण में जुटी रही साथ ही अन्य निर्माण कार्य चल रहे हैं लेकिन अविरल धारा बहाने की दिशा में चल रहे कार्य ठप हो गए हैं। इससे गोमती की अविरल धारा बहाने को उमड़े श्रद्धालु भी मायूस होने लगे है। लोगों का मानना है कि पूर्व में भी अविरल धारा बहाने को हुए प्रयासों की तरह यह भी प्रपंच ही साबित होगा।