कॉलर आईडी लगने वाला दूसरा बाघ बना चंदू
2012 में रहमानखेड़ा के बाघ को लगाई गई थी कॉलर आईडी
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। कॉलर आईडी लगाकर जंगल में छोड़े जाने वाला चंदू प्रदेश का दूसरा बाघ है। इससे पूर्व करीब छह साल पहले 2012 में रहमान खेड़ा में बाघ को कॉलर आईडी लगाने के बाद जंगल में छोड़ा गया था।
जंगल से बाहर घूम रहे वन्यजीवों को पुन: जंगल में छोड़ने अथवा जंगल में विचरण करने वाले किसी वन्यजीव के अध्ययन की निगरानी के लिए उसके गले में कॉलर आईडी लगाई जाती है। वर्ष 2012 में बाराबंकी के निकट रहमान खेड़ा के जंगल से बाहर आकर पशुओं पर हमलावर हुए बाघ को पकड़ा गया था। इस बाघ को भी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के माध्यम से ही कॉलर आईडी लगाने के बाद जंगल में छोड़ा गया था। इसके बाद एक माह पूर्व पांच फरवरी को गजरौला थाना क्षेत्र के बुढ़िया इटौरिया में पकड़ी गई बाघिन विधि को भी कॉलर आईडी लगाकर छोड़ने का निर्णय हुआ था लेकिन कॉलर आईडी उपलब्ध न होने के चलते बिना कॉलर आईडी के ही बहराइच के करतनिया घाट में छोड़ दिया गया था। अब चांदूपुर से पकड़े गए बाघ चंदू को दुधवा नेशनल पार्क में छोड़ने से पहले कॉलर आईडी लगाई जा रही है। इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के निदेशक जी. आरेंद्रन मंगलवार को ही कॉलर आईडी लेकर पीलीभीत पहुंच गए थे जो बुधवार को बाघ के साथ दुधवा चले गए थे।