पीलीभीत। अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक पांडेय ने पूरनपुर क्षेत्र में साढ़े पांच वर्ष पहले हुए चर्चित किशोर कुमार उर्फ बबलू हत्याकांड में पिता-पुत्र सहित सात आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की राशि से आधी रकम इस घटना में घायल हरिओम की दी जाएगी।
गांव सबलपुर निवासी हरिओम ने 1 मार्च, 2014 को पूरनपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने भाई किशोर कुमार उर्फ बबलू के यहां सबलपुर गांव गए थे। उनका दूसरा भाई हरदीप भी साथ था। शाम 4:40 बजे गांव के ही हरि बाबू उर्फ पप्पू, उनका बेटा सुशांत उर्फ विजय, रमाकांत और उनके बेटे राज किशोर उर्फ मोनू, राज कमल उर्फ लाल, पवन के अलावा श्रवण पांडेय मकान में घुस आए। हरि बाबू, सुशांत, राज कमल, राज किशोर, पवन के हाथों में कांता-बांका और श्रवण तथा रमाकांत के हाथ में तमंचे थे। आरोपियों ने हरिओम और उसके भाई किशोर से पूर्व में लिखाए गए मुकदमे में फैसला करने को कहा। मना करने पर गालियां दीं और विरोध पर हरिओम और किशोर को पकड़कर घसीट कर खड़ंजे पर ले गए। वहां हमलावरों ने कांता-बांका और अन्य धारदार हथियारों से ताबड़ तोड़ हमलाकर किशोर कुमार उर्फ बबलू की मौके पर ही हत्या कर दी। हरिओम को भी गंभीर चोटें आईं।
पुलिस ने 7 मार्च, 2014 को हरि बाबू को गिरफ्तार कर उससे बांका बरामद किया। विवेचना के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया गया। सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक पांडेय ने गुरुवार को सातों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
भाई पर हुए हमले की पैरवी करना बना थी बबलू की हत्या की वजह
पीलीभीत। पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र के सबलपुर गांव निवासी किशोर कुमार उर्फ बबलू की हत्या के मामले में उसके चाचा और चचेरे भाइयों को न्यायालय ने सुनवाई के बाद दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले को परिवार के लोगों ने स्वीकार करने के साथ ही बबलू के साथ न्याय बताया है।
इधर, पूरे घटनाक्रम पर नजर डालें तो बबलू की हत्या महज इस बात पर दी गई थी चूंकि वह अपने भाई श्रवण कुमार पर हुए हमले की पैरवी में जुटा था। बता दें कि घटना से करीब एक साल पहले जमीन के विवाद को लेकर उसके भाई श्रवण कुमार पर हमला करते हुए उसके चाचा व अन्य लोगों ने गोली मार दी थी। इसमें श्रवण कुमार घायल हुआ था। इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। हालांकि पुलिस ने इसको झूठा बताते हुए क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी। इस मामले को बबलू हाईकोर्ट लेकर गया था। वह इसमें पैरवी कर रहा था और परिजन के अनुसार इसी रंजिश में घटना के दिन उस पर उसके चाचाओं और चचेरे भाइयों ने हमला कर दिया। पहले सुलह का दबाव बनाया गया और न मानने पर बबलू को घर से खींचकर खड़ंजे पर ले गए और वहीं पर उस पर हमला करते रहे थे। इसमें उसकी जान चली गई थी। इस घटना में बबलू के परिवार के कुछ अन्य लोगों के भी घायल होने की बात कही गई थी और दूसरे पक्ष से भी राजकिशोर उर्फ मोनू को चोटें आई थीं।
पांच भाइयों में एक भाई से छोटा था बबलू
मृतक किशोर उर्फ बबलू अपने पांच भाइयों में एक भाई आनंद प्रकाश से छोटा था, जबकि बबलू से छोटे हरदीप, श्रवण कुमार और हरिओम हैं। बबलू की बहन की शादी बरेली में हुई है। वहीं बबलू की शादी भी नवाबगंज बरेली के गांव मुड़िया निवासी ऊषा देवी से हुई थी। उसके पांच बच्चे स्वाति, शालिनी, मोहित, शोभित और राधा हैं।