पीलीभीत। सिस्टम की नाकामी से जिले में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना को ग्रहण लग रहा है। जिन अस्पतालों को योजना में शामिल किया गया है, इनमें से कई सरकार की मंशा को पलीता लगा रहे हैं। कई अस्पतालों में तो उचित व्यवस्था तक नहीं हैं। इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को पहले तो जांचों के नाम पर इस कदर उलझाया जाता है कि वे परेशान हो जाते हैं फिर इलाज के बजाय उन्हें दुत्कार दिया जाता है। इसका खुलासा खुद स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक 69600 लोगों के गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इनमें कुल 2235 मरीजों को अब तक आयुष्मान योजना के तहत लाभ दिया गया है। हैरत की बात तो यह है कि यदि जनपद के अंदर उपचार की बात करें तो मात्र 975 मरीजों को ही लाभ मिल सका है, इनमें भी 55 मरीजों को सरकारी अस्पतालों में ही उपचार दिया गया है। शेष 1260 मरीजों को जिले से बाहर उपचार दिलाया गया है। इससे साफ तौर पर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की लापरवाही उजागर हो रही है। सूत्रों की मानें तो योजना शुरू होते ही आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बिना मानक और सुविधाओं की जांच किए ही जिले के अस्पतालों को योजना में शामिल कर दिया।
आयुष्मान योजना में तीन सरकारी और छह निजी अस्पताल हैं शामिल
जिले में छह प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंग होम आयुष्मान योजना के तहत पैनल में शामिल किए गए हैं। इनके अलावा सरकारी अस्पतालों में जिला पुरुष अस्पताल, महिला अस्पताल और बीसलपुर सीएचसी शामिल हैं। विभागीय रिकॉर्ड में सरकारी अस्पतालों में महज 55 मरीजों का अब तक इलाज हुआ है। सीएचसी की हकीकत तो यह है कि यहां डॉक्टरों और संसाधनों की कमी के चलते मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। पैनल में शामिल कौशल्य देवी आई हॉस्पिटल, भरत सेठी नर्सिंग होम, सचान नर्सिंग, मैकूलाल, तरुण सेठी और अनुज नर्सिंग होम भी मरीजों को भर्ती करने से कतरा रहे हैं।
तरुण सेठी, मैकूलाल और अनुज नर्सिंग होम आए निशाने पर
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के जिन प्राइवेट अस्पतालों को योजना में शामिल किया है, उनमें से तरुण सेठी, मैकूलाल और अनुज नर्सिंग होम हैं, जो अब तक सिर्फ 12 मरीजों को ही उपचार दे सके हैं। यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। डॉक्टरों की मनमानी का आलम ये है कि गोल्डन कार्ड होने पर भी लाभार्थी को टरका दिया जाता है। अब स्वास्थ्य विभाग भी इसे अपनी गलती मान रहा है। आयुष्मान के जिला प्रबंधक विवेक मिश्रा ने बताया कि उक्त सभी अस्पतालों और नर्सिंग होम संचालकों को कम केस करने पर बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी चल रही है।
योजना में शामिल कुछ अस्पताल रुचि नहीं ले रहे है। ऐसे अस्पतालों को योजना से बाहर किए जाने की तैयारी है। इसकी रिपोर्ट जल्द उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। शीघ्र ही योजना को गति देने के लिए तीन अन्य अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा जाएगा। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ