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एडीओ रिटायर भी हो गए पर विभाग जांच पूरी नहीं कर सका

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पीलीभीत। रिटायर्ड एडीओ पंचायत की नियुक्ति में गड़बड़ी के मामले की जांच डीडी पंचायत के निर्देश पर भी पूरी नहीं हो सकी। इस पर डीडी पंचायत ने नाराजगी जताई है। एक बार फिर डीपीआरओ को पत्र भेजकर पांच दिन का अल्टीमेटम देते हुए नियुक्ति से संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। ऐसा नहीं करने पर डीपीआरओ के खिलाफ कार्रवाई को शासन को लिखे जाने की बात कही गई है।
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मामला मरैारी ब्लॉक में तैनात रहे रिटायर्ड एडीओ पंचायत पवन शुक्ला का है। सेवानिवृत्त होने से चंद दिन पहले एडीओ की नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमतताएं बरतने का आरोप लगाते हुए बर्खास्त सचिव अंगनलान ने डीडी पंचायत महेंद्र सिंह से शिकायत की थी। जिसमें पवन शुक्ला की नियुक्ति 1983 में पंचायत सेवक के पद पर होना और उनके द्वारा कभी भी पंचायत सेवक पद पर भर्ती प्रक्रिया में न तो भाग लेने और न ही कोई परीक्षा उत्तीर्ण करना बताया गया था। इतना ही नहीं 1986 में पंचायत सेवक के पद से अनियमित रूप से पंचायती राज विभाग से नियम विरुद्ध तरीके से ग्राम्य विकास विभाग में लिपिक पद पर नियुक्त कर शासन को लाखों रुपये की क्षति पहुंचाने का आरोप लगाया गया था।
मामले को गंभीरता से लेते हुए डीडी पंचायत ने दस जून को डीपीआरओ को पत्र भेजकर सात दिन में आख्या भेजने के निर्देश दिए, लेकिन विभागीय अफसरों ने डीडी के आदेश को ताक पर रखकर आख्या नहीं भेजी। इधर, 30 जून को पवन शुक्ला के सेवानिवृत्त होने के बाद उनके अवशेेष भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने का पता चलते ही एक बार डीडी पंचायत ने डीपीआरओ को आड़े हाथ लिया है। पांच दिन के अंदर नियुक्ति से संबंधित आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश है। इधर, सीडीओ रमेश चंद्र पांडेय का कहना है कि डीडी के आदेश की अवहेलना करना गलत है। डीपीआरओ को जांच कर आख्या भेजने के निर्देश दिए जाएंगे।
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