पीलीभीत। शासन ने कई दशक बाद प्रदेश में अग्रिम जमानत एंटीसिपेटरी बेल बहाल की। जिले में दो मामलों के चार आरोपियों ने कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई। प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला ने पहले मामले में फर्जी गोल्डन कार्ड बनाने के आरोपी और दूसरे मामले में मारपीट कर कान में फ्रैक्चर पहुंचाने के आरोपी पिता-पुत्र समेत तीन की गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगाई। दोनों मामलों में अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।
अग्रिम जमानत की बहाली के बाद जिले में पहली अर्जी शहर कोतवाली के धोखाधड़ी के मामले में मोहल्ला देशनगर निवासी जितेंद्र कुमार ने दाखिल की। कहा कि तीन जुलाई को सीएमओ और अन्य उच्चाधिकारी उसके प्रतिष्ठान पर आए। कोतवाली पुलिस आयुष्मान कार्ड के संबंध में पूछताछ करने के बाबत दोपहर एक बजे ले गई और रात के एक बजे उसे छोड़ा। अखबार में छपी खबरों के आधार पर उस पर मुकदमा दर्ज हुआ, उसने आशंका जताई कि पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेगी, अग्रिम जमानत दी जाए। जितेंद्र पर फर्जी गोल्डन कार्ड बनाए जाने का आरोप है। मामलेे की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने सेे इंकार कर दिया। अर्जी खारिज कर दी।
दूसरे मामले में थाना जहानाबाद पर दर्ज गैर इरादतन जानलेवा हमने के मामले में गांव अमखेड़ा निवासी फजल अहमद, उसके पुत्र शाकिर और गांव के ही मोहम्मद यूसुफ ने अग्रिम जमानत की अर्जी दी। उन्होंने कहा कि 31 मई 2019 की घटना में पुलिस ने पहले हल्की धारा में रिपोर्ट लिखी और बाद में कान में फ्रैक्चर पाए जाने का आधार बताकर मामला धारा 308 में तरमीम कर दिया। यह घटना मस्जिद का चंदा मांगने को लेकर हुई कहासुनी के परिणाम स्वरूप हुई। प्रभारी सत्र न्यायधीश संजीव शुक्ला ने मामले की सुनवाई के बाद तीनों आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता धीरेंद्र मिश्र भी न्यायालय में मौजूद रहे। जिले में अग्रिम जमानत लागू होने के बाद दो अर्जिया ही कोर्ट में दी गई। दोनों मामलों में कोर्ट ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगाई।
गोल्डन कार्ड संबंधी यह था मामला
फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाए जाने का मामला शासन स्तर पर पहुंचने पर पिछले दिनों डीएम वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर देशनगर स्थित राजपूत जनसेवा केंद्र पर पूरनपुर तहसीलदार अनुराग सिंह और सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने छापा मारा था। संदेह केे आधार पर जांच को लिए 91 गोल्डन कार्डों में चार फर्जी कार्डों से संबंधित अभिलेख नहीं दिखा पाने पर जिला प्रबंधक पियूष रत्न की ओर से कोतवाली में केंद्र संचालक जितेंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से बरामद गोल्डन कार्ड उपलब्ध नहीं कराने की बात कहकर आरोपी को छोड़ दिया। इधर, अब कोर्ट ने मामला आयुष्मान से जुड़ा होने का संज्ञान लिया है। अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया।