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कमिश्नर की आवभगत में बच्चों की भूख भी भूल गए

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कमिश्नर की आवभगत में बच्चों की भूख भी भूल गए
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पीलीभीत। 34 वीं मंडलीय बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता एवं शैक्षिक समारोह में अव्यवस्थाएं हावी रहीं। अधिकारी कमिश्नर की नजर में खुद को गुड मैन साबित करने की होड़ में बच्चों की भूख तक भूल गए। यही वजह रही कि अंतिम दिन भूखे पेट खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करना पड़ा। निर्णय को लेकर निर्णायकों और व्यायाम शिक्षकों में भी कई बार जमकर नोंकझोक हुई। खास बात यह रही कि मैदान में आराम फरमाने के लिए शिक्षकों द्वारा फैलाई गईं कुर्सियां खिलाड़ियों को हटानी पड़ी। मुख्यअतिथि के देर से पहुंचने के कारण सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देने के लिए सुबह से तैयार बैठे बच्चों को भी मायूस होना पड़ा।
गांधी स्टेडियम में रविवार को तीन दिवसीय मंडलीय बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता का समापन हो गया। मंडल के चारों जिलों से आए करीब साढ़े आठ सौ बच्चों को तीन दिन अव्यवस्थाओं का शिकार होना पड़ा। सभी जिलों के खिलाड़ियों को स्टेडियम से काफी दूर ठहरने की व्यवस्था की गई थी। उन्हें स्टेडियम तक लाने के लिए वाहन की व्यवस्था नहीं थी। करीब एक से दो किमी दूरी तक इन खिलाड़ियों को ट्रैफिक व्यवस्था से जूझते हुए स्टेडियम तक पैदल ही पहुंचना पड़ा। प्रतियोगिता के अंतिम दिन भी खिलाड़ियों को अधिकारियों की उपेक्षा का शिकार होना पड़ा। सुबह हल्का फुल्का नाश्ता कर पूरे दिन प्रतिभागी भूखे पेट प्रतिभाग करना पड़ा। पीलीभीत और बदायूं के बीच हो रही हैंडबॉल प्रतियोगिता में रेफरी पर गलत निर्णय देते हुए शिक्षक भिड़ गए और जमकर नोंक झोक शुरु हो गई। बात हाथापाई तक पहुंच गई। बाद में अन्य शिक्षकों ने बमुश्किल शांत कराया। जिससे प्रतियोगिता को भी रोकना पड़ा। खास बात तो यह रही कि कुछ शिक्षकों ने धूप में आराम फरमाने के लिए मैदान में कुर्सियां फैला दी थीं। जिन्हें उन्होंने वहीं छोड़ दिया। मुख्यअतिथि मंडलायुक्त के पहुंचने से कुछ देर पहले ही आनन फानन में खिलाड़ियों से कुर्सियों को हटवाया गया।
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सिर्फ दौड़े ही नहीं, नंगे पैर फुटबाल भी खेले
बेसिक विद्यालयों की मंडलीय खेल कूद प्रतियोगिता में बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर व पीलीभीत जिले के खिलाड़ी विद्यार्थियों ने काफी दम खम से खेल में भाग लिया, लेकिन हैंडबाल और फुटबाल खेल के दौरान काफी कमियां देखने को मिली। बच्चे अक्सर फाउल तो होते ही थे, हिट व थ्रो भी प्रापर नहीं कर पा रहे थे। प्रतियोगिता के दौरान इनमे से अधिकांश बच्चों के पैर में जूते नहीं थे। नंगे पैर दौड़ने के साथ उन्हें फुटबाल भी नंगे पैर ही खेलना पड़ा। इस दौरान जो बच्चे जुता पहने थे उनके जूते से पैर दब जाने अथवा पैर में पैर लग जाने से कई बच्चों को मामूली चोट भी लगी। शाहजहांपुर व बरेली के बीच हुए फुटबाल मैच में शाहजहांपुर का इमरान तो फिल्ड में एक खिलाड़ी के जूते की चोट से घायल हो कर गिर गया। खेल बीच में रोक कर उसे साथियों ने रेफरी की मदद से प्राथमिक उपचार दिया।
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