खेती के लिए इस समय किसान को सबसे अधिक पैसे की दरकार है। गन्ने की गुड़ाई करानी हो या फिर धान, गन्ने की फसल की सिंचाई अथवा उसमें खाद व कीटनाशक दवाओं का छिड़काव। इन सबके लिए उसे धन की आवश्यकता है। डीजल के दाम बढ़ने के साथ किसानों की यह मुश्किल तो बढ़ी है ही ऊपर से उसकी खाली जेब ने उसके माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। यह हाल तब है जब खुद किसानों का चीनी मिलों पर 480 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य भुगतान बाकी है। उपचुनावों में पराजय के साथ देश के कई प्रदेशों में बुलंद हुई किसानों की आवाज के बाद प्रदेेश सरकार जागी है। उसने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान की अदायगी के लिए 7000 करोड़ रुपये का पैकेज जारी करने का निर्णय लिया है। इससे जिले की चीनी मिलों से जुड़े किसानों को भुगतान की आस तो जगी है, लेकिन यह बकाया भुगतान किसानों को समय पर मिल पाएगा इसको लेकर अभी संदेह बरकरार है।
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दो सहकारी, एक निजी मिल की भुगतान स्थिति बेहद खराब
जिले में चार चीनी मिलें हैं। जिसमें दो सहकारी एवं दो निजी क्षेत्र की हैं। शुरू एक माह तो लगभग सभी मिलों ने भुगतान किया, लेकिन पेराई सत्र बंद होते-होते निजी क्षेत्र की पीलीभीत स्थित मिल को छोड़ शेष सभी की स्थिति खराब होती गई। मिल बंद होने तक जिले की चारों चीनी मिलें किसानों का 480 करोड़ रुपये दबाकर बैठ गईं। मिल वार बात करें तो सर्वाधिक गन्ना पेराई करने वाली शहर की एलएच मिल भुगतान में सबसे आगे हैं। मिल अब तक 460 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है जो कुल भुगतान का लगभग 71 प्रतिशत है। मिल पर अब भी 183 करोड़ रुपये बकाया है। बरखेड़ा स्थित चीनी मिल अब तक आधा भुगतान कर सकी है। इस मिल पर 176 करोड़ रुपया बकाया है। वहीं दूसरी ओर दोनों सहकारी मिलों का भुगतान निजी मिलों से पीछे है। पूरनपुर स्थित किसान सहकारी चीनी मिल ने इस पेराई सत्र में 98.68 करोड़ का गन्ना खरीदा लेकिन इसके सापेक्ष मात्र 49.30 करोड़ का भुगतान किया जो लगभग 50 प्रतिशत है। इस मिल ने पांच फरवरी तक खरीदे गन्ना का भुगतान किया है। इसी प्रकार बीसलपुर स्थित सहकारी मिल ने 130.56 करोड़ का गन्ना खरीदा जिसके सापेक्ष 59.91 करोड़ का भुगतान किया है। यह मिल भी किसानों का अभी 70.64 करोड़ रुपये दाबे बैठी है। सहकारी मिलों का भुगतान सरकार के माध्यम से होता है और शासन से धनराशि न मिलने से दिक्कत आ रही थी। अब जब सरकार के गन्ना किसानों को 7000 हजार करोड़ रुपया जारी करने के निर्णय लिया है तो किसानों को भी भुगतान की उम्मीद तो जगी है, लेकिन यह भुगतान उसे कब तक मिल सकेगा इसको लेकर वह चिंतित भी है।
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देर से ली किसानों की सुध
सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है। पूरा गन्ना सीजन बीतने पर किसानों की याद आई है। देर से ही सरकार ने गन्ना किसानों के भुगतान का निर्णय लिया। इससे काफी राहत मिलेगी।
सोहनलाल, प्रसादपुर, पूरनपुर
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सहकारी मिलों से हो नियमित भुगतान
गन्ने का लगभग दो लाख रुपये बकाया है। भुगतान न मिल पाने से धान की रोपाई नहीं हो पा रही है। सरकार ने देर से निर्णय लिया है। यदि पहले यह कदम उठाते तो आगामी खेती के लिए अच्छा होता।
अनोखेलाल गंगवार, ढकिया रंजीत, बीसलपुर
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निजी मिलों से लगातार भुगतान कराया जा रहा है। बरखेड़ा ने सोमवार को ही 1.30 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। शासन से सहकारी मिलों के लिए धनराशि मंजूर हुई है। जैसे ही यह धनराशि प्राप्त हो जाएगी किसानों को उनका बकाया भुगतान जल्द से जल्द कराने का प्रयास किया जाएगा। - जितेंद्र कुमार मिश्र, जिला गन्ना अधिकारी