बेसिक शिक्षा विभाग में ब्लॉक स्तर पर तैनात ब्लॉक सह समन्वयकों की कार्यशैली संदेह के घेरे में है। शैक्षिक गुणवत्ता सुधार को तैनात किए गए अधिकांश एबीआरसी डीएम के समक्ष एक बैठक के दौरान गुणवत्ता के मामले में खुद ही जीरो पाए गए। इस पर डीएम ने ब्लॉकों में तैनात सभी 30 एबीआरसी की लिखित परीक्षा कराने के निर्देश दिए हैं।
शासन ने परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधार को ब्लॉक स्तर पर विषयवार ब्लॉक सह समन्वयक तैनात किए थे। अपने जिले में भी वर्ष 2011 में ब्लॉक स्तर पर सह समन्वयकों की तैनात की गई थी। वर्ष 2013 में कार्यकाल पूरा होने के बाद शासन के निर्देश पर सभी ब्लॉक सह समन्वयकों का कार्यकाल 31 मार्च 2016 तक बढ़ा दिया गया। बताते हैं कि उसके बाद भी यह एबीआरसी अपने अपने पदों पर जमे रहे। गत वर्ष मार्च व अप्रैल में विभाग द्वारा इन सभी को कार्यमुक्त कर उनके मूल तैनाती वाले स्कूलों में भेज दिया गया। विभाग द्वारा करीब छह माह पूर्व एबीआरसी चयन को लेकर परीक्षा व साक्षात्कार हुए। जिसमें विभिन्न ब्लॉकों के लिए 30 एबीआरसी का चयन किया गया।
शासन के निर्देशानुसार इन सभी एबीआरसी को स्कूलों में जाकर शिक्षण कार्य करना चाहिए था और अपने क्षेत्र के दूसरे स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधारनी चाहिए थी। बताते हैं कि एबीआरसी का पद हाथ आते ही अधिकांश ने ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर ही अपना डेरा डाल दिया। इनमें अधिकांश खंड शिक्षा अधिकारी का कार्य निपटाने के चलते धीरे-धीरे अधिकारी की भूमिका निभाने लगे। ऐसे में इन शिक्षकों के विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। इधर कुछ दिन पूर्व महकमे की हुई समीक्षा बैठक के दौरान डीएम शीतल वर्मा ने एबीआरसी के कार्यों की जानकारी लेने के साथ उनके ज्ञान को परखा तो अधिकांश एबीआरसी फेल हो गए। इस पर डीएम शीतल वर्मा ने कड़ी नाराजगी जताते हुए बीएसए डॉ. इंद्रजीत प्रजापति को चयनित सभी एबीआरसी की लिखित कराने के निर्देेश दिए। इस संबंध में बीएसए ने बताया कि जिलाधिकारी द्वारा सभी ब्लाक सह समन्वयकों की लिखित परीक्षा कराने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम द्वारा लिखित परीक्षा की तिथि 15 मार्च निर्धारित की गई है। यह परीक्षा विकास भवन में होगी।