पीलीभीत। अधिकारियों की मिलीभगत के चलते 100 से अधिक पंचायत सफाई कर्मी विभिन्न जगह संबद्ध थे। इस बाबत अमर उजाला में छपी खबर पर संज्ञान लेकर डीएम ने संबद्धता समाप्त करने के आदेश दिए थे। डीएम के आदेश पर डीपीआरओ ने 34 सफाई कर्मियों की संबंद्धता समाप्त कर दी। जबकि अधिकारियों के यहां संबद्ध चल रहे 38 की सूची डीएम को भेजी गई है।
पंचायती राज विभाग की ओर से जिले की 721 ग्राम पंचायतों में करीब 1300 पंचायत सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं। करीब आठ साल से पंचायत सफाई कर्मचारियों की तैनाती के बाद भी सफाई न होने से अधिकांश गांव की स्थिति बदहाल है। दरअसल अधिकारियों और बाबुओं की मिलीभगत के चलते 100 से अधिक पंचायत सफाई कर्मी विभिन्न स्थानों पर संबद्ध चल रहे थे। इनमें कुछ अधिकारियों के निजी सेवक बने हुए हैं और कई चालक हैं। कंप्यूटर का ज्ञान रखने वाले अलग-अलग कार्यालयों में बाबू बने हुए हैं। इस पर अमर उजाला ने 16 मई के अंक में खबर प्रकाशित की थी। अमर उजाला की खबर पर संज्ञान लेकर डीएम शीतल वर्मा ने सभी पंचायत सफाई कर्मचारियों की संबद्धता निरस्त करने के आदेश दिए थे। इस पर डीपीआरओ ने विभिन्न स्थानों एवं छोटे अधिकारियों के साथ संबद्ध किए सफाई कर्मचारियों की संबद्धता समाप्त कर दी। जबकि जिला और तहसील स्तर के अधिकारियों के साथ संबद्ध चल रहे 38 कर्मचारियों की संबद्धता निरस्त करने को सूची डीएम को भेजी है। डीपीआरओ शशिकांत पांडेय ने बताया संबद्धता निरस्त करने के साथ ही सभी को गांव में तैनाती दी गई है। नियमित गांव जाकर सफाई न करने पर कार्रवाई की जाएगी।
कौन कर्मचारी कहां थे संबद्ध
प्रेमलता, कमलपति और सीमा देवी पंचायत उद्योग से संबद्ध थीं। इन्हें क्रमश: मरौरी के तकिया, कोहना और चाटडांग गांव भेजा गया है। रामनिवास मरौरी ब्लाक, श्याम मुरारी बरखेड़ा, राजकुमार, रोहित कुमार व दिनेश सिंह पूरनपुर, नूरूलहसन व धर्मपाल अमरिया ब्लाक कार्यालय, रामसिंह व जयसिंह एनआईसी और जसवंत डीपीआरओ कार्यालय से संबद्ध थे। इनके अलावा 20 ऐसे हैं जो दूसरे गांव से संबद्ध दर्शाए गए थे।