पीलीभीत। सजायाफ्ता अपराधियों को भी लोकतंत्र रक्षक सेनानी की सुविधाएं देने का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद शासन ने अब प्रदेश के सभी जिलों में लोकतंत्र सेनानियों की पात्रता की जांच कराने का फैसला किया है। इसका आदेश भी जारी कर दिया गया है। दरअसल, पीलीभीत के 22 लोकतंत्र सेनानियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश पर एडीएम न्यायिक जांच कर रहे हैं। उनकी जांच में प्रथम दृष्टया पांच लोकतंत्र सेनानी फर्जी पाए जा चुके हैं। यह जांच अभी जारी है। कई और भी फर्जी पाए जाने की आशंका जताई जा रही है। इधर, फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद शासन ने सभी लोकतंत्र सेनानियों की पात्रता जांचने के निर्देश दिए हैं। शासन के आदेश पर जांच अलग से होगी, लेकिन एडीएम (न्यायिक) ही करेंगे।
आपात काल के दौरान राजनीतिक मामलों में जेल जाने वालों को शासन ने लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिया। जिले में पिछली सरकार में कई लोग आपराधिक मामलों में जेल जाने और सजायाफ्ता होने के बावजूद सिस्टम से साठगांठ कर फर्जी तरीके से लोकतंत्र सेनानी बन गए। इसकी शिकायत कई बार की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसे लेकर पीलीभीत के 22 लोकतंत्र सेनानियों ने उच्च न्यायालय मेें याचिका दायर की। इस मामले में हाईकोर्ट ने 31 अक्तूबर 2018 को पारित आदेश में जिला मजिस्ट्रेट को छह सप्ताह के अंदर जांच कर शपथ पत्र हाईकोर्ट में दाखिल करने के आदेश दिए थे। इस पर डीएम डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र ने एडीएम न्यायिक देवेंद्र कुमार मिश्र को मामले की जांच सौंप दी। एडीएम न्यायिक देवेंद्र कुमार मिश्र ने बताया कि जांच में अब तक पांच लोगों को फर्जी लोकतंत्र सेनानी पाते हुए उनकी पेंशन रोक दी गई है। अभी जांच जारी है। कुल 168 लोकतंत्र सेनानी है अभी कई और के भी कई फर्जी पाए जाने की आशंका है।
इधर, इस याचिका के बाद पीलीभीत में फर्जीवाड़ा सामने आने पर शासन ने पूरे प्रदेश में लोकतंत्र सेनानियों की पात्रता की जांच कराने के सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिए हैं। एडीएम ने बताया कि शासन के आदेश पर अलग से जांच की जाएगी। उसका हाईकोर्ट के आदेश पर हो रही जांच से कोई संबंध नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट डीएम के माध्यम से न्यायालय में दाखिल की जानी है। डीएम ने शासन के आदेश पर होने वाली जांच की जिम्मेदारी भी एडीएम (न्यायिक) को ही सौंप दी है।