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गोमती झील में ग्रेड ए शेड्यूल के भी कछुए

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गोमती झील में ग्रेड ए शेड्यूल के भी कछुए
भारत में ही पाए जाते है इंडियन रुफ्ड टर्टल, वाइल्डलाइफर ने किया अध्ययन
डीएम ने कछुए के विवरण समेत बोर्ड लगवाने के दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। गोमती उदगम स्थल की शोभा और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी मुख्य झील में वैसे तो कई प्रजाति के कछुए हैं, लेकिन वाइड लाइफ कंजरवेशन सोसाइटी के एक्सपर्ट के अध्ययन के बाद नया खुलासा हुआ है। गोमती झील में विचरण कर रहे कछुओं में ग्रेड ए शेड्यूल के इंडियन रुफ्ड टर्टल नाम की प्रजाति भी मौजूद हैं। इसकी जानकारी होने पर डीएम डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र ने अधिकारियों को कछुए के विवरण का हवाला देते हुए उसकी पूरी जानकारी को दर्शाने वाला बोर्ड लगवाने के निर्देश दिए हैं।
गोमती की अविरल धारा बहाने में डीएम डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र ने सफल अभियान शुरू किया। इसके साथ ही गोमती की रौनक बढ़ाने के भी सफल प्रयास किए गए। डीएम के निर्देश के बाद गोमती ट्रस्ट का गठन किया गया। इसके बाद से उदगम स्थल पर कई विकास कार्य कराए गए। उदगम स्थल पर श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हो, इसके लिए धार्मिक कार्यक्रम के साथ अन्य कार्यक्रम भी होने लगे। गोमती उद्गम स्थल की मुख्य झील में विचरण कर रहे कछुए उदगम स्थल पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं। कछुआ संरक्षण के लिए भी डीएम प्रयासरत हैं। वहीं पिछले दिनों वाइल्डलाइफ कंजरेवशन सोसाइटी के जुड़े अख्तर मियां ने गोमती उदगम स्थल पहुंचकर झील में मौजूद कछुओं की स्थिति को परखा। उनके अध्ययन के बाद एक नया खुलासा हुआ। इसकी जानकारी होने पर डीएम डॉ. मिश्र ने एसडीएम कलीनगर को कछुए के विवरण समेत बोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं।
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भारत में ही पाई जाती है ये प्रजाति
अखतर मियां के मुताबिक उद्गम स्थल की मुख्य झील में ग्रेड ए शेड्यूल के इंडियन रुफ्ड टर्टल भी मौजूद हैं। जो भारत में ही पाए जाते हैं। इन कछुओं को आईयूसीएन की संकटमुक्त सूची में शामिल किया गया है। साथ ही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची एक के अंतर्गत इन्हें संरक्षित किया गया है।
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