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धान खरीद में खेल, किसान बेबस और अफसर फेल
नमी के नाम पर घाटे में बेचना पड़ रहा धान
महिपाल गंगवार
पीलीभीत। मंडियों में धान में नमी की मात्रा और धान को सुखाने के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। धान क्रय केंद्रों पर धान बेचने आए किसान मानकों के पेच में उलझते जा रहे हैं। धान में नमी बताकर केंद्रों से किसानों को वापस भेजा जा रहा है। मजबूरी में किसान घाटे के दाम लेकर फसल बेच रहे हैं। हालांकि धान की सरकारी खरीद में आधिकारिक तौर पर मिलर्स की कोई सीधी भूमिका नहीं है, लेकिन फिर भी पूरी खरीद प्रक्रिया उन्हीं के इर्द-गिर्द चल रही है।
धान खरीद में बिचौलियों को बाहर का रास्ता दिखाने और पारदर्शिता लाने के लिए सरकार की तमाम कोशिशें नाकाफी साबित हो रही है। शासन की सख्ती और जिले के अफसरों के दावे हवाहवाई साबित हो रहे है। किसानों को धान का समर्थन मूल्य नहीं पा रहा है। मंडी में धान की आवक शुरू होते ही नमी का ऐसा खेल शुरू हुआ कि किसान मानकों में उलझता जा रहा है। किसान को 1550 से ऊपर का भाव नहीं मिल पा रहे है। 1300 से 1550 रुपये प्रति क्विंटल पर रेट थम गया है। मजबूरी में किसान घाटे में धान बेच रहा है। अफसर भी किसानों की इस समस्या को लेकर संजीदा नहीं है।
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ऐसे ठगे जा रहे किसान
मंडी में चार दिन में करीब 34 हजार क्विंटल धान की आवक हुई हैं। यह सारा धान आढ़तियों ने खरीदा है। किसानों की मानें तो क्रय केंद्रों पर धान पहुंचते ही केंद्र संचालक नमी बताकर धान लौटा देते है। बोली लगने के बाद दो सौ से ढाई सौ रुपये प्रति क्विंटल घाटे में धान बेचना पड़ता है। मंडी में एक दिन तो किसानों को धान सुखाने में लग रहा है तो दूसरे दिन भी खरीदार और बोलीदाता नमी अधिक बताकर कम दाम लगाते है। धान में 22 से 26 फीसदी तक नमी बताकर बोली की शुरुआत 1375 रुपये से 1550 रुपये पर रुक जा रही है। इसके ऊपर किसान के कहने के पर बोलीदाता हाथ खड़े कर रहे हैं। मजबूरी में किसान को घाटे में धान बेचना पड़ रहा है। ऐसे में किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे है। यही कारण है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर अब तक बोहनी नहीं हो सकी है।
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...तो राइस मिलर्स को पहुंचाया जा रहा लाभ
सरकारी क्रय केंद्रों पर धान खरीद की चार दिन बाद भी शुरूआत नहीं हो सकी है। इसके पीछे अफसर नमी अधिक होने को कारण बता रहे हैे। अब सवाल यह है कि नमी वाला धान आसानी से आढ़तों पर बोली लगाकर पहुंचाने का काम किया जा रहा है। धान में नमी अगर अधिक है तो आढ़ती को ऐतराज क्यों नहीं? इसके पीछे लंबे समय से साठगांठ की चर्चाएं आम रहती है। इस बार भी स्थिति इससे अलग नहीं है। केंद्र भले सूने पड़े हो, आढ़तों पर खरीद तेजी से हो रही है। खास बात ये है कि मंडी समिति में शहर के 29 राइस मिलर्स की खुद की आढ़त है। सूत्रों की मानें तो अधिक खरीद भी इन्हीं के यहां हो रही है।
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बोले किसान.....
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नमी की आड़ में किसान से धोखाधड़ी
न्यूरिया के रहने वाले किसान प्रकट सिंह ने कहा कि मंडी स्थित क्रय केंद्र पर खरीद का हाल देखने पर पता चला कि धान में नमी बताकर किसानों को धान वापस कर दिया जा रहा है। क्रय केंद्र का यह हाल देखकर अब मन बदल चुका है। अब धान तभी काटूंगा, जब बाजार में उसका सही मूल्य मिलेगा। सरकारी क्रय केंद्र पर जाकर अपना समय बेकार नहीं करूंगा।
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कमीशन के खेल में हो रहा उत्पीड़न
धान लेकर आए मझोला के किसान गुरुनाम सिंह ने कहा कि नमी बताकर किसानों को खुलेआम ठगा जा रहा है। अभी धान में नमी बताई जा रही है वहीं कुछ दिन बाद धान अधिक सूखा लाने के बात कहकर किसानों को परेशान किया जाएगा। सरकारी मशीनरी कमीशन के खेल में किसानों को उत्पीड़न कर रही है।
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चौथे दिन खुला खाता, 72 क्विंटल की हुई खरीद
पीलीभीत। मंडी में खोले गए अधिकांश क्रय केंद्रों पर चौथे दिन भी सन्नाटा पसरा रहा। शुक्रवार को मंडी स्थित यूपी एग्रो केंद्र पर 72 क्विंटल की खरीद हुई। यह धान जहानाबाद के रहने वाले जगजीवन लेकर पहुंचे। वहीं आढ़तियों के पास धान के ढेर लगे रहे। प्रशासन ने गेहूं खरीद के लिए मंडी समिति में 13 केंद्र खोले हैं, लेकिन इनका लाभ किसानों को नहीं मिलता दिख रहा।
वर्जन
मंडी स्थित यूपी एग्रो केंद्र पर धान की खरीद प्रारंभ हो गई। 72 क्विंटल धान की तौल कराई गई। नमी वाले धान की मंडी समिति के कर्मचारियों की मौजूदगी में बोली लगवाकर निलामी कराई जा रही है। बोली के दौरान राइस मिलर्स भी मौजूद रहते है।
- अविनाश कुमार झा, डिप्टी आरएमओ