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बारिश के साथ बाढ़ ने तोड़ दी किसानों की कमर
कभी शारदा तो कभी देवहा नदी ने मचाई तबाही
क्रासर...
बीते एक माह में सैकड़ों एकड़ फसल, भूमि चढ़ी भेंट
क्रासर...
मुआवजा छोड़िए, नुकसान का सही आंकलन तक नहीं हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। जिले में मानसून भले देर से आया लेकिन उसके बाद जो बारिश हुई उससे पिछले तीन साल का रिकार्ड टूट गया। पहाड़ों पर हुई बारिश व बादल फटने की घटना के चलते तराई के इस जिले की नदियां बनबसा, नानक सागर डैम आदि में पानी छोड़े जाने से उफनाती रहीं। बीते एक माह में करीब पांच बार बाढ़ के हालात जिले के कई स्थानों पर पैदा हुए। नदी के बढ़ते-घटते जल स्तर से पूरनपुर, कलीनगर, अमरिया, बीसलपुर तहसील में बहने वाली नदियों ने कटान भी जम कर किया। सैकडों एकड़ किसानों की जमीन लहलहाती फसलों के नदी की भेंट चढ़ गई। राणाप्रताप नगर में जहां ग्रामीण करीब एक माह तक जल भराव की समस्या से जूझते रहे वहीं गभिया सहराई, रमनगरा जैसे दूरदराज के गांव बाढ़ से जूझते रहे वहीं जिला मुख्यालय के कुछ निचले मोहल्लों तक में बाढ़ ने दस्तक देकर एक बार सभी को दहशतजदा कर दिया। प्रशासन तक को अलर्ट जारी करना पड़ा। पेश है तहसीलवार बाढ़-बारिश से हुए नुकसान पर एक रिपोर्ट-
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वर्ष बारिश (एमएम)
2016 481.63
2017 582.80
2018 646.06
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खेती हुई बर्बाद, महीनों बाढ़ से घिरे रहे किसान
पूरनपुर। बाढ़ ने तहसील क्षेत्र में इस बार भी जमकर तबाही मचाई। करीब 200 किसानों की 125 एकड़ खेतों में लहलहाती फसलें बाढ़ व नदी कटान की भेंट चढ़ गई। ट्रांस शारदा क्षेत्र में उफनाई शारदा का पानी करीब एक माह तक ग्राम राणाप्रताप नगर व राजीव नगर के ग्रामीणों के घरों व प्रमुख रास्तों में भरा रहा। अभी भी सिद्धनगर-हजारा, कबीरगंज-राणाप्रताप नगर व राणाप्रताप नगर-कबीरगंज मार्ग से बाढ़ का पानी पूरी तरह उतर नहीं सका है, जिसके चलते आवागमन पूरी तरह सुचारू नहीं हो सका है। गांव में भरा बाढ़ का पानी उतरने से कीचड़, गंदगी लोगों को झेलनी पड़ रही है। इस दौरान लोगों को घर में खाना बनाने से लेकर पशुओं के चारे तक का संकट झेलना पड़ा। ऊंचे स्थानों पर शरण लिए तमाम परिवार खाना बदोशों सा जीवन बिता रहे हैं। बाढ़ के बाद संबंधित गांवों में अब संक्रामक रोग ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। राजस्व प्रशासन चार गांव में 182 किसानों की 77.667 हेक्टेयर भूमि नदी में समाने का तर्क दे रहा है। नायब तहसीलदार अनुराग सिंह ने बताया कि बाढ़ में अशोक नगर की 35.625 हेक्टेयर, राणा प्रतापनगर की 8.851 हेक्टेयर, चंदिया हजारा की 14.664 हेक्टेयर और भरतपुर की 16.997 हेक्टेयर भूमि नदी में समाई है। बरसात में घर ढहने आदि की कोई घटना नहीं हुई।
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बाघ के साथ बाढ़-कटान की दहशत
माधोटांडा। टाइगर रिजर्व से सटे गभिया सहराई में लगभग 48 किसानों की 80 एकड़ और रमनगरा में किसानों की लगभग 90 एकड़ और धुरिया पलिया में 125 एकड़ समेत करीब 300 एकड़ कृषि भूमि मय हरी-भरी धान गन्ना सोयाबीन की फसल कटान के चलते बाढ़ व शारदा नदी कटान के भेंट चढ़ गई। इस इलाके के लोग बाघ व तेंदुएं के आतंक से अभी भी जूझ रहे हैं। इस तरह किसानों का लगभग 18 करोड़ का नुकसान हुआ है। राजस्व कानूनगो दीनदयाल लेखपाल राजेश के मुताबिक जो फसलें नष्ट हुई हैं उसका सर्वे किया जा रहा है।
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अमरिया क्षेत्र में देवहा ने मचाई तबाही
अमरिया। तहसील क्षेत्र में बाढ़-बारिश से गांव जगत व बरादुनवा में लगभग 16 किसानों की 325 बीघा और नगरिया कॉलोनी में 11 किसानों की 125 बीघा, मझलिया में आठ किसानों की 120 बीघा, तुर्कपुर बढ़वार में 24 किसानों की 150 बीघा, विशनपुर खलीनबादा में 150 बीघा, शुक्ला फार्म हाउस की 50 बीघा हरी-भरी गन्ना एवं धान की खड़ी फसलों सहित लगभग 950 बीघा जमीन बाढ़ कटान के चलते देवहा नदी के गर्भ में समा गई। इस तरह किसानों का लगभग तीन करोड़ का नुकसान हुआ है। तहसीलदार एके राय के मुताबिक गांव जगत व तुर्कपुर बढ़वार में देवहा नदी में आई बाढ़ से हुए कटान का उन्होंने खुद निरीक्षण किया है। अन्य स्थानों पर हुए कटान का हलका लेखपालों से सर्वे कराया गया है। विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मुआवजे के लिए शासन को भेजी जा रही है।
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जमीन, फसल नष्ट फिर भी नहीं मिला मुआवजा
बीसलपुर। देवहा नदी में आई बाढ़ से नदी से सटे स्थित गांव कर्रखेड़ा निवासी सुनील, रामेश्वर दयाल, रामासरे, महेंद्र, हरीश, राजबहादुर, वीरपाल, सर्वेश, अरविंद, नंदराम, नीलेश, तौलेराम, राजेंद्र, शांत कुमार, डम्मर सिंह, जगदीश सरन, रामदास, ओमकार, जगदीश प्रसाद, दीनानाथ और रमाकांत आदि किसानों की करीब 12 एकड़ जमीन कटकर मय गन्ना फसल के नदी में समा चुकी है। इसके अलावा कटना नदी में आई बाढ़ की चपेट में आकर नदी से सटे गांव मीरपुर ग्रंट निवासी आदेश सिंह, रमेश सिंह और मुनेश सिंह की 10 बीघा जमीन कटकर नदी में समा गई है। इस जमीन पर खड़ी तिल की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। इस गांव के राजपाल सिंह का कच्चा घर भी ढह गया है। किसान मजदूर संगठन के तहसील संयोजक गुल्लू पहलवान ने तहसीलदार राकेश मौर्य को ज्ञापन देकर बाढ़ में हुए नुकसान की भरवाई कराने की मंाग की लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। तहसीलदार का कहना है कि बाढ़ में किसानों के हुए नुकसान की जांच कराई जा रही है, जांच रिपोर्ट आने के बाद उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
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गांव मुड़िया में भी देवहा ने मचा चुकी तबाही
बरखेड़ा। माह अगस्त में देवहा नदी में आई बाढ़ से क्षेत्र के दो गांवों के गांव निवासी लालता प्रसाद, श्रीकृष्ण, बिहारी लाल, महेंद्रपाले, प्रेमशंकर, ओमप्रकाश, रामचंद्रलाल, भजनलाल, तिलकराम, कृष्णपाल, महेंद्रपाल, पूरनलाल, रामेश्वरदयाल, नत्थूलाल, शेर सिंह, वेदपाल, माखनलाल, रोशनलाल समेत 54 किसानों की करीब पौने तीन सौ बीघा जमीन बाढ़ के आगोश में समा गई थी। इनमें दस किसान ऐसे भी हैं जो पूरी तरह भूमिहीन हो गए। विधायक रामसरन वर्मा ने कटान का मुआयना कर किसानों की हर संभव मदद कराने का भी आश्वासन दिया था। राजस्व टीम ने कटान पीड़ितों की जमीन का सर्वे कर जल्द मुआवजा दिलाने की बात भी कहीं थी, लेकिन एक माह बाद भी कटान पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिल सका।
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पीड़ित किसान बोले-
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बाढ़ ने इस बार भी इलाके में जमकर तबाही मचाई। घरों और रास्तों पर जलभराव से नांव से आवागमन करना पड़ा। अब पानी उतरने के बाद कीचड़ और बीमारियों से इलाके के लोग परेशान हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाए गए स्वास्थ्य शिविर मात्र औपचारिक साबित हुए।
कमलेश गुप्ता, राणा प्रतापनगर।
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बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब भी राणाप्रताप नगर से नहरोसा तक सड़क पर इतनी कीचड़ है कि लगों को पैदल निकलना मुश्किल हो रहा है। गांवों में गंदगी से दुर्गंध फैली है। पशुओं और लोगों में बीमारी फैलने के बाद भी प्रशासन कोई सुध नहीं ले रहा है।
सोहन सिंह, नहरोसा
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देवहा नदी में आई बाढ़ से 2005 में भी मेरा घर नदी में समा चुका था। कुछ जमीन भी कटी थी। 11 एकड़ जमीन ही बची थी। खेत में ही मकान का निर्माण कर खेती कर रहे थे, लेकिन इस बार देवहा के कटान में सारी जमीन कट गई। केवल मकान व आस पास में एक एकड़ जमीन ही बची है।
इकबाल सिंह, गांव जगत