...कहीं गैंडा परियोजना की तरह न हो टाइगर सफारी का हश्र

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Bareily Bureau

माधोटांडा (पीलीभीत)।टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को लुभाने के लिए गैंडा परियोजना लागू करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। वहीं अब वर्तमान सरकार ने भी टाइगर सफारी का प्रस्ताव मांगा है। ऐसे में कही गैंडा परियोजना की तरह ही टाइगर सफारी का हश्र न हो जाए, जिसे आज तक लागू नहीं किया जा सका है। वजह यह है कि वन विभाग की ओर से बरूआ कुठारा में चिह्नित किए गए हिस्से में बड़े पैमाने पर अवैध कब्जेदार काबिज हैं। प्रदेश की पूर्व सरकार ने टाइगर रिजर्व बनाने के बाद टाइगर रिजर्व को विकसित करने के लिए काफी लंबी चौड़ी घोषणाएं कीं। पर्यटकों को लुभाने के लिए तरह-तरह की योजनाएं बनाई गईं, लेकिन यहां मात्र चूका बीच पिकनिक स्पॉट के अलावा कुछ नहीं मिल सका। इसके बाद जनपद दौरे पर आए मुख्य सचिव आलोक रंजन व तत्कालीन मंत्री हाजी रियाज अहमद ने टाइगर रिजर्व में गैंडा परियोजना लागू करने की घोषणा की। इसको लेकर शासन ने प्रस्ताव मांगा था। टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज में जमीन की तलाश शुरू की गई। इसके बाद महोफ रेंज का 1200 हेक्टेयर रकबा और उससे सटी बराही रेंज का 300 हेक्टेयर रकबा मिलाकर कुल 1500 हेक्टेयर रकबे का चयन किया गया। आनन-फानन में चयनित इलाके में पेड़, पानी के स्रोत, घास की प्रजातियों का सर्वे कर प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया, लेकिन उसके बाद गैंडा परियोजना भी ठंडे बस्ते में चली गई। इधर अब वर्तमान सरकार ने टाइगर सफारी का प्रस्ताव मांगा है। इसको लेकर वन विभाग की ओर से बराही रेंज के बरुआ कुठारा जंगल का चयन किया जा रहा है। वन संरक्षक वीके सिंह ने पिछले दिनों बरुआ कुठारा जाकर चयनित भूमि का निरीक्षण भी किया, लेकिन वन विभाग के सूत्रों की माने तो टाइगर सफारी का हश्र भी गैंडा परियोजना की तरह हो सकता है क्योंकि बरूआ कुठारा में पहले से ही कुछ भाग में अवैध कब्जेदार काबिज हैं। महकमे को प्रस्ताव भेजने से पहले अवैध कब्जेदारों से भूमि को खाली कराना होगा। टाइगर रिजर्व बनने के बाद से लेकर अब तक पर्यटकों को लुभाने के लिए मात्र इसी तरह की घोषणाएं होती रही हैं, लेकिन अभी तक धरातल पर किसी भी योजना को लागू नहीं किया जा सका। ऐसे में इस वर्ष भी 15 नवंबर से पर्यटकों को मात्र चूका बीच में ही घूूमकर संतोष करना पड़ेगा। ---वर्जन: गैंडा परियोजना को लेकर भूमि का चयन व सर्वे करने बाद प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। इस मामले में अब शासन स्तर पर ही कार्रवाई की जानी है। शासन से स्वीकृत मिलते ही इस पर कार्य शुरू करा दिया जाएगा। अनिल शाह, वन क्षेत्राधिकारी, बराही रेंज
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