पीलीभीत। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से इस बार नदी के पार करीब आठ सौ किसान संकट में घिर गए हैं। नाव से गेहूं नदी के इस पार लाने के बदले 50 रुपये प्रति क्विंटल भाड़ा देना पड़ रहा है। इसके चलते किसानों ने नदी पार अस्थाई खरीद केंद्र बनाने की मांग की है।
शारदा नदी के पार रामनगरा, गुन्हान, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर गांव में करीब आठ सौ पट्टेदार हैं। राजस्व विभाग की ओर से शारदा नदी के पार एक और दो एकड़ के कृषि पट्टे किए हैं। अधिकांश पट्टेदार भूमिधरी भी हो चुके है, जो खेती कर रहे है। इधर, कुछ दिन पूर्व से शारदा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हो गई है। जिसके चलते किसानों को अपनी काटी जा रही गेहूं की फसल को लाने में काफी कठिनाइयां हो रही है। कारण यह है कि तीनों ग्रामों के अंतर्गत नदी के पार पड़ने वाली कृषि फसलों को नाव से ही इस पार लाना पड़ता है। पहले नदी का जलस्तर कम होने के चलते डनलपों व ट्रैक्टर-ट्रॉली से आसानी से ही गल्ला इसपार आ जाता है, लेकिन नदी का जलस्तर बढ़ने से मात्र नाव का सहारा ही शेष बचा है। किसानों के मुताबिक गेहूं काटने के बाद पहले बीस से तीस रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से ट्रैक्टर-ट्रॉली या डनलप से शारदा नदी तक लाया जा रहा है, इसके बाद करीब बीस रुपये प्रति क्विंटल की दर से नाव पर लादकर इस पार उतरना पड़ता है। ऐसे में किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ा हुआ है। नदी का जलस्तर बढ़ने से परेशान स्थानीय जनप्रतिनिधि व किसान रमनगरा के प्रधान प्रशांत साना, बिल्लु राजभर, परितोष राय, किसान नेता रामस्वरूप, रामदरस, भूदेव दास ने समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रशासन से नदी के उस पार एक अस्थाई गेहूं खरीद केंद्र स्थापित करने की मांग की है।
अवैध कब्जेदारों ने भी हजारों एकड़ पर लगा रखी है फसल
शारदा नदी के पार मात्र पट्टेदार ही नहीं बल्कि भूमिधरी रजिस्ट्रीशुदा किसानों के अलावा टाइगर रिजर्व की करीब डेढ़ हजार एकड़ जमीन भी अवैध कब्जेदारों द्वारा जोती जाती है। जिसके चलते नदी के पार हजारों कुंटल गल्ला खड़ा हुआ है। उसको भी नाव से ही लाना पड़ रहा है। हालांकि यह नाव का ठेका टाइगर रिजर्व की ओर से ही दिया गया है।
नाव डूबने का खतरा अधिक
नदी के पार लगी कृषि फसलों को लाने के लिए वर्तमान में काफी समस्या हो रही है। वहीं नदी का जलस्तर बढ़ने से किसानों को काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने भय सता रहा है कि कहीं नाव का संतुलन बिगड़ने के चलते नाव डूब न जाए।