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जहां दिख रहा बाघ महिलाएं वहीं बीन रही लकड़ियां
जंगल में मानव की आवाजाही ना बन जाए सिर दर्द
क्रासर...
बाघ की मौजूदगी के बाद भी वनकर्मी नहीं लगा रहे प्रतिबंध
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा (पीलीभीत)। जंगल से सटे शारदा डैम के निकट चूका स्थित एसएसबी कैंप तक बाघ व तेंदुए की मौजूदगी देखे जाने के बाद भी टाइगर रिजर्व के वनकर्मी सीमा से सटे गांव की महिलाओं को लकड़ी बीनने की इजाजत दे रहे हैं। ऐसे में कभी भी बाघ मानव पर हमलावर हो सकते हैं।
बराही रेंज के अंतर्गत जंगल सीमा से सटा पुरैना ताल्लुके महाराजपुर गांव है। दो दिन पूर्व ग्रामीणों ने शाम के समय एक तेंदुए के जंगल से बाहर निकलकर एसएसबी कैंप के निकट आने की बात कही थी। हालांकि एसएसबी के जवानों की ओर से इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी थी। चहलकदमी को देखते हुए वनकर्मियों ने सीमा से सटे ग्रामीणों को सर्तक करने की बात भी कही थी, लेकिन इसके बावजूद जंगल में मानव के प्रवेश पर प्रतिबंध नहीं लग सका है। सीमा से सटे गांव की महिलाएं सब सीडरी हरदोई ब्रांच नहर के हेड पर एकत्र होकर झुंड के रूप में जंगल से लकड़ी बीन रही हैं। महिलाएं अपरान्ह तीन बजे तक जंगल से वापस आ जाती हैं। परिवार के अन्य सदस्यों के आने के बाद एकत्र की गई लकड़ी को साइकिल से बांध कर ले जाते हैं। जंगल से सटे इलाके की रहने वाली एक महिला ने बताया कि दो दिन पूर्व रात को तेंदुआ इस क्षेत्र की ओर आ गया था, शोर शराबा करने पर वापस लौट गया। इससे पहले भी इस क्षेत्र में बाघ की चहलकदमी देखी जाती रही है। ऐसे में बाघ व तेंदुए की चहलकदमी के बावजूद महिलाओं का जंगल में घुसकर लकड़ी बीनने का सिलसिला नहीं रुक रहा है। इस मामले में वनकर्मी गंभीर नहीं हुए हैं। ऐसे में वन्यजीव कभी भी मानव पर हमला कर सकते हैं। खास बात यह है कि पिछले दिनों सप्त सरोवर का दौरा करने पहुंचे फील्ड डायरेक्टर एच राजा मोहन ने जंगल में मानव की आवाजाही को देख नाराजगी व्यक्त कर वनकर्मियों को आवाजाही बंद करने के सख्त निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद इस इलाके में मानव की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं लग रहा है।