शारदा सागर डैम के सामने रमनगरा क्षेत्र में शारदा नदी के किनारे बने स्पर छह को यदि कोई बड़ी क्षति होती है तो इससे आबादी क्षेत्र समेत शारदा डैम के अस्तित्व को भी खतरा हो सकता है। मालूम हो कि वर्ष 1989 में इसी स्थान पर बना 9सी स्पर के बह जाने के बाद भारी तबाही हुई थी। इस दौरान कई कालोनियों का आबादी क्षेत्र व सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि रेत के ढेर में तब्दील हो गई थी।
शारदा सागर डैम को बनाते समय सिंचाई विभाग के आला अफसरों ने शारदा नदी के डैम के नजदीक होने के कारण दाहिने किनारे की ओर एक मार्जनल बांध बनाने के साथ पत्थर की बड़ी ठोकरें नदी के भीतरी हिस्से में बनाई गई थी। उस समय नतीजा यह निकला कि शारदा नदी दाहिने किनारे की ओर भू-कटान नहीं कर सकी थी लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि इसके बाद सिंचाई विभाग के आला अफसरों ने इस ओर से अपना ध्यान पूरी तरह हटा लिया। लापरवाही का तो आलम यह रहा कि जो स्पर नदी के भीतरी हिस्से में बनाए गए थे, उसके तार के जाल सड़ने गलने के साथ क्षतिग्रस्त हो गए। इसके बाद धीरे कई स्पर नदी की भेंट चढ़ गए और नदी ने फिर दाहिने किनारे पर कटान शुरू कर दिया।
ढाई दशक पूर्व स्पर 9 सी बहने से मची थी अफरातफरी
सिंचाई विभाग के अफसरों द्वारा कई स्पर क्षतिग्रस्त होने के बाद भी इस पर कोई खासा ध्यान नहीं दिया। हालात यह हुए कि शारदा नदी डैम के नजदीक आ पहुंची। वर्ष 1989 में शारदा में आई भीषण बाढ़ से नदी के भीतरी हिस्से में बना स्पर 9 सी बह गया। इस स्पर के बहने से इलाके में भीषण तबाही हुई। इसमें रमनगरा, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, भूड़ा गोरखडिब्बी, बिजौरी खुर्दकलां, रमनगरा बुझिया का आबादी का क्षेत्र व हजारों एकड़ कृषि भूमि नदी की भेंट चढ़ गई। यहां बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए। ये बेघर बाढ़पीड़ित शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र में रह रहे हैं।
रमनगरा के स्पर छह पर है दारोमदार
वर्ष 1989 से लेकर अब तक सिंचाई महकमा नदी के दाहिने किनारे पर बचाव कार्य के नाम करोड़ों रुपये खर्च कर चुका है, लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहा जाए कि घोषणा के बावजूद यहां आज तक स्थायी तटबंध नहीं बनाया गया। यहां सिर्फ अस्थाई बाढ़ नियंत्रण कार्यों के नाम पर रकम ठिकाने लगाई जाती रही। विशेषज्ञों के मुताबिक स्पर छह व उसके आसपास के इलाके में स्थायी बाढ़ नियंत्रण कार्य कराना बेहद जरूरी है। सिंचाई विभाग के मुताबिक यदि स्पर छह क्षतिग्रस्त होता है तो इलाके में भारी तबाही के साथ शारदा डैम सहित आबादी का इलाका भी प्रभावित हो सकता है। हालांकि इन दिनों यहां मात्र बैंबो कटर लगाकर काम चलाया जा रहा है। अभियंताओं का कहना है कि मौजूदा समय में अस्थाई बाढ़ नियंत्रण कार्यों के अलावा कोई और चारा भी नहीं है।