मछलियों के प्रजनन काल के चलते सभी सरकारी जलाशयों में पहली जुलाई से शिकार पर पाबंदी लग जाती है। इसके बावजूद शारदा सागर डैम में मछली का अवैध शिकार बेरोकटोक जारी है। आरोप है कि यह अवैध धंधा पुलिस व टाईगर रिजर्व के वनकर्मियों की मिली भगत से चल रहा है।
जिले के सरकारी जलाशयों में 30 जून तक मछली शिकार का ठेका होता है। इसके बाद 15 सितंबर तक मछली का प्रजनन काल रहता है। इस दौरान मछली के शिकार पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहता है। इधर शारदा सागर डैम में वैसे तो पूरे वर्ष प्रदेश सरकार की लेट लतीफी के चलते मछली का ठेका ही नहीं हुआ, लेकिन डैम की तलहटी में बसे मछुवारे खुलेआम मछलियों का शिकार कर इसकी सप्लाई पड़ोसी प्रांत उत्तराखंड व अन्य महानगरों में कर रहे हैं। हालांकि शारदा डैम की मछली की जिम्मेदारी मत्स्य निगम की है, लेकिन यह टाइगर रिजर्व से सटे शारदा डैम में अवैध शिकार का मामला था, इसलिए पुलिस व वन कर्मियों की सांठगांठ से इस धंधे में चार चांद लग गए। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शारदा डैम में मछली का ठेका 1.68 करोड़ में दिया गया है।
क्षेत्र के पुरैना ताल्लुके महाराजपुर, मठईया लालपुर, कंजिया सिंहपुर, गभिया सहराई, महाराजपुर समेत उत्तराखंड की सीमा से सटी पुरबिया कॉलोनी के मछुवारे भी इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहे हैं। इधर जहां तक मत्स्य निगम का सवाल है जिले में मत्स्य निगम का कोई कार्यालय ही नहीं है। इसका कार्यालय बरेली में है। डैम पर मात्र जलाशय प्रभारी श्याम लाल की तैनाती की गई है। जलाशय प्रभारी भी स्टाफ न होने का दुखड़ा रोते आ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो उत्तराखंड के कुछ मछली व्यापारियों की निगम के अधिकारियों से सांठगांठ है। इसके चलते ही स्थानीय बंगाली कालोनियों के मछुवारे बकायदा डिपो बनाकर अवैध शिकार के धंधे को अंजाम दे रहे हैं। यह मछलियां उत्तराखंड समेत अन्य महानगरों में सप्लाई की जा रही है।