माधोटांडा। जहां एक ओर टाइगर रिजर्व में बाघों सहित अन्य वन्य जीवों की संख्या में बड़े पैमाने पर इजाफा होने से वन क्षेत्र का एरिया कम पड़ने लगा है, वहीं दूसरी ओर शारदा नदी के पार सुरक्षित वन क्षेत्र में तेजी से अवैध जुतान हो रहा है। इन दिनों डेढ़ दर्जन से अधिक ट्रैक्टरों से जुताई होने के साथ अवैध कब्जेदार गेहूं की बुवाई करने में जुटे हैं। वहीं वन विभाग आंखें मूंद कर बैठा है।
शारदा नदी के पार टाइगर रिजर्व का सुरक्षित वन क्षेत्र है और सीमा से सटे नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी है। जहां से बाघ, हाथी, गेंडे सहित अन्य वन्य जीव विचरण करते हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों से कब्जेदारों ने वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जे करने शुरू कर दिए। ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, रमनगरा, गोरख डिब्बी, गुन्हान इलाके में वन विभाग की अधिकांश भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है। बताते हैं कि कब्जेदार से लेकर सफेदपोश नेताओं ने तो 10 से 20 एकड़ तक वन की भूमि का जुतान कर फसलें भी बो रखी हैं। इस क्षेत्र में अवैध कब्जेदारों द्वारा जुताई का सिलसिला जारी है। बताते हैं कि वन विभाग के दो कर्मचारी तो इसी के चलते कई सालों से इस इलाके में जमे हैं।
कब्जेदारों ने जंगली हाथियों का कॉरीडोर समाप्त कर दिया गया। पहले हाथी नेपाल से आते थे और कई-कई माह तक इस इलाके में रहते थे। नेपाली सेंचुरी के गैंडे भी लग्गा भग्गा तक ही आ रहे है। जहां टाइगर रिजर्व में बाघों सहित वन्यजीवों की बढ़ती संख्या से एरिया कम होता जा रहा है वही दूसरी ओर इसी इलाके में वन भूमि का तेजी से अवैध जुतान हो रहा है। वन महकमा हाथ पर हाथ धरे बैठा है।