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अंकुश लगाने में वन महकमा फेल, ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश

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पीलीभीत। टाइगर रिजर्व बनने के बाद से बाघ एवं वन्यजीवों के हमले की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। पिछले आठ माह में बाघ के हमले की घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। एक खूनी बाघ को चिड़ियाघर भेजने के बाद भी हमले कम नहीं हो रहे हैं। संसाधनों के अभाव से जूझ रहा वनविभाग हमलों पर अंकुश लगाने में फेल रहा है। मंगलवार को मिहीलाल बाघ का 14वां शिकार बना।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व को घोषित हुए तीन साल पूरे गए हैं, लेकिन यहां की व्यवस्थाएं अभी भी अधूरी हैं। यहां तैनात अधिकारी पर्यटन को बेहतर बनाने और नेेताओं व उच्च अधिकारियों को सैर कराने में व्यस्त रहते हैं। जंगल की सुरक्षा और संसाधन को पूरा कराने के लिए केवल शासन को पत्र लिखकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। इसी का परिणाम है कि तीन साल बाद भी एनटीसीए अथवा शासन से टाइगर एवं वन्यजीवों से आम आदमी की सुरक्षा के कोई ठोस उपाय नहीं किए जा चुके और एक के बाद एक ग्रामीण इसकी भेंट चढ़ रहे हैं। पिछले आठ माह में (24 अक्तूबर 2016 से 20 जून 2017 तक) घटनाओं में एकाएक आई तेजी के कारण 14 लोग बाघ का शिकार हो चुके हैं।
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आठ माह में बाघ के हमले में गई इनकी जान
तारीख नाम/ गांव
1. 24 अक्तूबर 2016 बेनीराम मरौरी
2. 18 नवंबर 2016 लालाराम मरौरी
3. 28 नवंबर 2016 बाबूराम पिपरिया संतोष
4. 11 दिसंबर 2016 अहमद खां डगा
5. 16 जनवरी 2017 राजीवराठौर पिपरिया संतोष
6. 05 फरवरी 2017 धनीराम कुंवरपुर
7. 07 फरवरी 2017 नन्हेंलाल पिपरिया
8. 11 फरवरी 2017 गंगाराम कलीनगर
9. 16 फरवरी 2017 कलावती मेवातपुर
10. 05 मार्च 2017 ब्रह्मस्वरूप रम्पुरा
11. 31 मार्च 2017 श्यामबिहारी जमुनिया
12. 09 मई 2017 ताराचंद्र अनवरगंज
13. 18 जून 2017 केवलप्रसाद रूपपुर मरौरी
14. 20 जून 2017 मिहीलाल शिवपुरिया
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