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कटान का कहर, गांव से 200 मीटर दूर रह गई शारदा

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03 पीबीटीपी 30
कटान का कहर, गांव से 200 मीटर दूर रह गई शारदा
ग्रामीणों की बढ़ी धड़कन, बचाव के प्रयास नाकाफी
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा(पीलीभीत)। पिछले एक पखवाड़े से शारदा का कटान धुरिया पलिया क्षेत्र में रुकने का नाम नहीं ले रहा है। कटान की गति मंद जरूर हुई, लेकिन राहत दिखाई नहीं दे रही है। किसानों के मुताबिक बीते 15 दिनों में नदी करीब 150 एकड़ कृषि भूमि को लीलते हुए गांव की आबादी से मात्र 200 मीटर की दूरी पर पहुंच गई है। नदी और गांव की आबादी के बीच बीस साल पहले बनी पत्थर की ठोकर से नदी की धार टकरा रही है। ऐसे में अगर यह बचाव कार्य ध्वस्त हुए तो शारदा आबादी में पहुंच तबाही मचा देगी। इसके बावजूद प्रशासनिक अमला संजीदा नहीं दिखता। वहीं ग्रामीणों की धड़कने तेज हो गई हैं।
बीते दिनों पहाड़ों पर हुई बरसात के बाद शारदा का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में कटान शुरू हो गया था। पिछले एक पखवाड़े से शारदा ने गांव धुुरिया पलिया को निशाने पर ले रखा है और लगातार कटान कर रही है। किसानों के मुताबिक लगभग 150 एकड़ कृषि भूमि को नदी कटान के चलते निगल चुकी है। हालांकि दो दिनों में नदी का जलस्तर कम हुआ, कटान की गति भी कुछ धीमी हुई, लेकिन इसको लेकर अभी राहत मिलती नहीं दिखाई दे रही।
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24 घंटे में चार एकड़ फसल तबाह
बीते 24 घंटो में सुखविंदर सिंह की एक एकड़ गन्ने, सुरमुख सिंह की एक एकड़ धान व मेवा सिंह की दो एकड़ सोयाबीन की फसल का कटान हुआ है। जिससे किसान की महीनों की मेहनत एक पल में तबाह हो गई है।
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अब ठोकरों के सहारे धुरिया पलिया गांव
शारदा नदी के कटान का कहर न थमने से धुरिया पलिया गांव के बाशिंदों की धड़कने तेज हैं। कटान कर रही शारदा और आबादी के बीच अब सिर्फ ठोकरों का सहारा है। नदी से गांव को बचाने के लिए बनाई गई पत्थर की ये ठोकरें बीस साल पुरानी है। इन ठोकरों को क्षति न पहुंचे इसको लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। वहीं प्रशासन और जनप्रतिनिधि सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रह गए हैं। कोई भी ग्रामीणों के दर्द को समझ, निस्तारण कराने की सुधि नहीं ले रहा है।
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तो प्रशासन को तबाही का इंतजार
नदी में लगभग सात एकड़ भूमि मय गन्ने और धान की फसल के समा गई हैं। अब नदी आबादी के नजदीक पहुंच गई हैं। अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो गांव में तबाही होगी।
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सुरमुख सिंह, फार्मर
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प्रशासन का काम राहत देने लायक नहीं
मेरी दस एकड़ कृषि भूमि फसल समेत नदी में समा चुकी है। कटान तो जारी है, लेकिन इसको रोकने का काम प्रशासन नहीं कर रहा है। जो काम प्रशासनिक मशीनरी कर रही है, उसको राहत का नहीं कहा जा सकता।
सुखविंदर सिंह, किसान
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