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...ऐसे तो चलने से बंद हो जाएगा जन औषधि केंद्र

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...ऐसे तो बंद हो जाएगा जन औषधि केंद्र
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क्रासर...
मनमानी जारी, कमीशन के चक्कर में डॉक्टर नहीं लिख रहे दवा का साल्ट नेम
क्रासर---
दो दिन में केंद्र पर पहुंचे सिर्फ 40 मरीज, सैकड़ों को लौटाना पड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। जिला अस्पताल के मरीजों को जेनरिक दवाओं को लाभ नहीं मिल रहा है। चिकित्सक डीएम के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे है। हालत यह है कि निर्देश के बाद भी डॉक्टरों ने मरीजों के पर्चे पर दवा का साल्ट नेम नहीं लिखा। इससे जन औषधि केंद्र के काउंटर पर मरीजों को सस्ती दवाएं नहीं मिल सकीं और उन्हें वापस कर दिया गया। मजबूरन मरीजों को अस्पताल से बाहर जाकर दवाएं खरीदनी पड़ी। दो दिन में ओपीडी से आए पर्चों में सिर्फ 40 मरीजों को ही काउंटर से सस्ती दवाएं दी जा सकीं। सैकड़ों मरीजों को लौटना पड़ा।
जिला अस्पताल में डीएम डॉ. अखिलेश मिश्र ने रविवार को जिले के पहले जन औषधि केंद्र को शुभारंभ किया था। सीएमओ डॉ सीमा अग्रवाल की मौजूदगी में उन्होंने डॉक्टरों को निर्देश दिए कि वह मरीज के पर्चे पर दवा का साल्ट नेम जरूर लिखे ताकि मरीज को जन औषधि केंद्र पर सस्ती दामों में दवाएं आसानी से मिल जाए। लेकिन एमआर के खेल का हिस्सा बन चुके अस्पताल के मरीजों को डॉक्टरों ने मरीजों के पर्चे में बाहरी दवाओं का नाम लिखना मोटे कमीशन के चक्कर में जारी है। मरीज जन औषधि केंद्र पर पर्चे लेकर दवा लेने पहुंचे लेकिन उनको पर्चे पर दवा का साल्ट नेम नहीं होने के कारण लौटा दिया गया। केंद्र संचालक ओमनाथ पांडे ने बताया कि दो दिन में 90 मरीजों को 1800 रुपये की दवाएं दे गई। इनमें करीब 40 मरीज जिला अस्पताल के हैं।
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17पीबीटीपी-25
बरखेड़ा की रहने वाले सावित्री देवी जिला महिला अस्पताल का पर्चा लेकर दवाई लेने जन औषधि केंद्र पर पहुंची। पर्चे पर लिखी दवाई का साल्ट नहीं लिखे होने के कारण उन्हे वापस कर दिया गया। मजबूरी में सावित्री को निजी मेडिकल स्टोर का सहारा लेना पड़ा।
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17पीबीटीपी-26
कांति देवी के साथ भी ऐसा ही हुआ। पर्चे पर साल्ट का नेम नहीं लिखे होने के कारण उसे वापस ओपीडी भेज दिया गया। मरीज का आरोप है कि उसने डॉक्टर से साल्ट का नाम लिखने को कहना तो उसे भगा दिया गया।
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