पूरनपुर। रामलीला मेला मैदान पर सालों से काबिज 350 अतिक्रमणकारियों पर नगर पालिका प्रशासन सख्त हुआ है। उनको नोटिस भेजकर तीन दिन में अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। पालिका प्रशासन की ओर से की गई सख्ती से दुकानदारों में हड़कंप मचा है।
रामलीला मेला मैदान में अतिक्रमण कर काफी संख्या में दुकानें लगाई गई हैं। इसमें से कुछ दुकानदारों ने टीन शेड तो कुछ शटर लगाए हैं। यही नहीं अधिकांश दुकानदारों ने तो निर्माण भी करा रखा है। करीब एक साल पहले तक इन व्यापारियों से किराया वसूला जाता था। रामलीला मेले के समय अतिक्रमण कर लगाई गई दुकानों को हटवाने के लिए रामलीला मेला कमेटी और प्रशासन को हर बार जूझना पड़ता है। इसके बाद भी नाममात्र के अतिक्रमणकारी ही अपनी दुकानें हटाते हैं। इसके समाधान के लिए रामलीला मेला बचाओ कमेटी का गठन हुआ। इसके सदस्यों ने अतिक्रमण को लेकर कई बार धरना प्रदर्शन किया। अब एक बार फिर कवायद तेज हुई है। नगर पालिका ने करीब साढ़े तीन सौ दुकानदारों को नोटिस भेज तीन दिन में जगह खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया है। इसके बाद प्रशासन इसको हटवाएगा, जिसका खर्च भी दुकानदारों से वसूल किया जाएगा।
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नोटिस में रामलीला मेला मैदान का नहीं है हवाला
भेजे गए नोटिस में रामलीला मेला मैदान का कहीं हवाला नहीं दिया गया है। इसको लेकर नोटिस मिलने के बाद कुछ दुकानदार वकीलों से संपर्क में जुट गए हैं, ताकि किसी तरह से राहत मिल सके। उनका कहना है कि कई सालों से दुकानें लगी हैं। एक साल पहले तक रामलीला मेला कमेटी उनसे किराया और फड़ के दुकानदारों से तहबाजारी वसूल करती थी। ऐसे में वह अवैध नहीं है। पूर्व की रामलीला मेला कमेटी के पदाधिकारियों ने दुकानों के लिए उनको जगह दी थी।
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पहले रामलीला मेला मैदान नगर पालिका से अलग था। अब एसडीएम कोर्ट में सुनवाई के बाद रामलीला मेला मैदान को नान जेडए की श्रेणी में दर्ज कर दिया है। अब भूमि रामलीला मेला मैदान की नहीं, सरकारी हो गई है। जांच में करीब पौने पांच सौ अतिक्रमण पाए गए हैं। जिनमें से साढ़े तीन सौ को नोटिस दिया जा चुका है। शेष को नोटिस देने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द अभियान चलाया जाएगा।
मोहम्मद हनीफ, ईओ नगर पालिका