जोगराजपुर/पूरनपुर। टाइगर रिजर्व एवं इससे जुड़े जंगल के आसपास रहने वालों के लिए खेती करना मुसीबत बनता जा रहा है। 24 अक्तूबर 2016 से लगातार हो रहे हमलों में 21 लोगों की जान जा चुकी है। बाघ के इन बढ़ते हमलों के चलते खेती करने को मजदूर मिलना मुश्किल होते जा रहे है। इस घटना के बाद से यह समस्या और बढ़ सकती है।
नौ जून 2014 को शासन ने पीलीभीत के जंगलों को टाइगर रिजर्व घोषित किया था। इसमें शाहजहांपुर की खुटार रेंज को बफर जोन में रखा गया था। प्रारंभ में बाघ हमले की घटनाएं यदा कदा ही सामने आईं, लेकिन 24 अक्तूबर 2016 से शुरू हुआ हमलों का सिलसिला अभी तक जारी है। जंगल के बाहर आ रहे बाघ खेत में काम करने वालों को अपना निशाना बना रहे हैं। इसमें तीन लोगों की मौत 2016 में हुई, जबकि 2017 में 17 लोगों ने अपनी जान गंवाई। सेहामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के चतीपुर निवासी राजेश के रूप में वर्ष 2018 की यह पहली घटना है। सवा साल में जिले में 21 ग्रामीणों की जान बाघ हमले में जा चुकी है। अब तक हुई बाघ की ज्यादातर घटनाएं जंगल के आसपास ही हुई हैं कुछ घटनाओं में बाघ ने जंगल से 10 से 12 किमी दूर आकर भी ग्रामीणों को निवाला बनाया है।
भाइयों में सबसे बड़ा था राजेश
पूरनपुर। चतीपुर निवासी कामता के तीन पुत्रों में राजेश सबसे बड़ा था। उससे छोटा सुनील और केवल है। राजेश के परिवार में माता-पिता के अलावा पत्नी सुनीता और दो साल का पुत्र शिवा है।
सवा साल में हुए बाघ के हमले
1. 24/10/2016 बेनीराम मरौरी
2. 28/11/2016 बाबूराम पिपरिया संतोष
3. 11/12/2016 अहमद खां डगा
4. 11/12/2016 राजेश राठौर पिपरिया संतोष
5. 05/02/2017 धनीराम, कुंवरपुर
6. 07/02/2017 नन्हें लाल पिपरिया
7. 11/02/2017 गंगाराम कलीनगर
8. 16/02/2017 कलावती मेवातपुर
9. 05/03/2017 ब्रह्म्मस्परूप रंपुरा
10.31/03/2017 श्यामबिहारी जमुनिया
11. 09/05/2017 ताराचंद अनवरगंज
12. 18/06/2017 केवल प्रसाद रूपपुर
13. 20/06/2017 मिहीलाल शिवपुरिया
14. 01/07/2017 ननकी सैदुल्लागंज
15. 07/08/2017 तसलीम डांग
16. 08/08/2017 शमशुल सरैदा पट्टी
17. 10/08/2017 कुंवरसेन बेहरी
18. 18/082017 रामचंद्र पीलीभीत
19. 01/10/2017 बबलू खरगापुर
20. 26/12/2017 जोगेंद्र सिंह गढ़ा
21. 14/01/2018 राजेश चतीपुर
पीछे मुड़कर भी नहीं देख सके साथी मजदूर
जोगराजपुर/पूरनपुर। राजेश के साथ काम कर रहे मजदूर रामकरन, मनोज ने बताया कि जब बाघ दहाड़ता हुआ उनकी ओर दौड़ा तब राजेश को आवाज लगाते हुए वह सभी खेत से भागे, लेकिन राजेश पीछे रह गया और बाघ ने उसे दबोच लिया। दहशत के चलते बाघ तो उन लोगों ने देखा, लेकिन राजेश को दबोचते नहीं देख पाए। 200 मीटर दूर पहुंचने के बाद जब पलट कर देखा तो राजेश नहीं था। बस उसकी एक बार चीख सुनाई दी। इस पर उन्हें घटना आभास हुआ।
एक घंटा बाद मार्ग क्रास कर दूसरे खेत में गया बाघ
जोगराजपुर। भारी चहल कदमी व शोर-शराब के बाद भी बाघ उसी गन्ने के खेत में बैठा रहा जिसमें उसने राजेश का शिकार किया था। करीब एक घंटा बाद बाघ खेत से बाहर निकाला और सड़क क्रास कर दूसरे खेत मेें चला गया। बाघ को सड़क क्रास करते देख लोगों ने शोर-शराबा भी किया, लेकिन बाघ धीरे-धीरे खेत में चला गया।
मजदूरों ने भी बंद कर दी छिलाई
पूरनपुर। जिस गन्ना के खेत में घटना हुई। उसके आसपास गन्ने के कई खेत हैं। कुछ खेतों में मजदूर छिलाई भी कर रहे थे जबकि कुछ में किसान रखवाली में लगे थे। घटना के बाद आसपास के खेतों में गन्ना छिलाई कर रहे मजदूर दहशत में आ गए और उन्होंने छिलाई बंद कर दी।
जंगल से ढोई जाती है लकड़ी
जोगराजपुर। क्षेत्र की गढ़ा, पिपरा और नजीरगंज बीट में काम करने वाले कई मजदूर अक्सर जंगल पहुंचते है। मजदूर मजदूरी के बाद जंगल से साइकिलों पर बेरोक टोक लकड़ी लाते हैं। जिनकी सप्लाई आसपास के ईंट भट्टों पर भी की जाती है।
वाचर ने दिखाई बहादुरी
गन्ना के खेत से बाघ के दौड़ाने पर वाचर बहादुर और सुरेश ने खासी बहादुरी दिखाई। भगदड़ पर कुछ दूर भाग कर बहादुर ने अपने को संभाले हुए अपने एक साथी की बंदूक छीनकर फायर कर दिया। तब कहीं अन्य लोगों ने फायरिंग की।