न्यूरिया/पीलीभीत। वनकटी से निकलकर क्षेत्र में घूम रहा बाघ टंडोला को अपना मुस्तकिल ठिकाना बनाते नजर आ रहा है। पिछले पांच दिनों से बाघ गांव के किनारे गन्ने के खेत और इससे सटे तालाब पर चहल कदमी कर रहा है। सोमवार को वन विभाग की टीम ने तालाब के निकट से उसके पदचिह्न ट्रेस किए लेकिन बड़े क्षेत्रफल में फैले गन्ने में छिपे होने के चलते उसे पकड़ने में दिक्कत आ रही है। वहीं बाघ की चहल कदमी से गांव में दहशत और लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
15 जुलाई को वनकटी जंगल से निकलकर एक बाघ मेवातपुर और टाह गांव के बीच स्थित खेतों में पहुंच गया था। वन विभाग की टीम ने इसे वापस जंगल खदेड़ने को दो दिन प्रयास किया लेकिन कामयाबी नही मिली। इसके बाद बाघ 18/19 की रात शहर से कुछ दूरी पर स्थित टंडोला गांव के इर्द गिर्द पहुंच गया। तब से बाघ ने इसी क्षेत्र में अपना ठिकाना बना रखा है। रविवार को शाम भी घर से शौच को गई गांव के रामस्वरूप की 10 वर्षीय बेटी रश्मि ने तालाब पर बाघ को देखा था जिससे वह घबरा गई थी। इसकी सूचना पर सोमवार सुबह डीएफओ कैलाश प्रकाश, एसडीओ केपी सिंह, रेंजर गिर्राज सिंह, सतेंद्र चौधरी, वनदरोगा नवनीत यादव टीम के साथ टंडोला गांव पहुंचे और बाघ की तलाशी की। इसमें तालाब के निकट उसके पदचिन्ह मिले जो गन्ने के खेत की ओर गए थे। माना जा रहा है कि बाघ पड़ोस के ही आठ एकड़ में बोए गए गन्ने के खेत में बैठा है।
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फसल को नुकसान के चलते आ रही दिक्कत
बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम को हाथियों की मदद से गन्ने के खेतों में सर्च अभियान चलाना पड़ेगा। इससे फसल को काफी नुकसान होने की उम्मीद है। वन विभाग के पास इसका मुआवजा देने के लिए धनराशि नहीं है जिससे दिक्कत आ रही है। अब तक मुआवजे की व्यवस्था कर हाथियों की मदद से अभियान नहीं चलाया जाएगा तब तक बाघ पर नियंत्रण मुश्किल ही नहीं असंभव है।
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टंडोला के निकट बाघ की लोकेशन बताई गई थी जिस पर टीम के साथ मौका मुआयना किया गया। तालाब के पास पदचिह्न भी ट्रेस हुए। बाघ के गन्ने के खेत में छिपे होने के चलते दिक्कत आ रही है। निगरानी के लिए कैमरे लगाकर टीम तैनात की गई है।
- कैलाश प्रकाश, डीएफओ