पीलीभीत। बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी के दौरान शिक्षक बीमारी का बहाना नहीं बना सकेंगे। अब बीमारी के चलते अवकाश लेने वाले शिक्षकों को सीएमओ द्वारा निर्गत प्रमाणपत्र पर ही चिकित्सीय अवकाश मिल सकेगा। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव ने इसको लेकर दिशा निर्देश जारी किए हैं।
जिले में यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा सात फरवरी से शुरू हो रहीं हैं। परीक्षाओं को लेकर शासन ने कड़े दिशा निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड परीक्षा में माध्यमिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों की केंद्र व्यवस्थापक और शिक्षकों की ड्यूटी बतौर कक्ष निरीक्षक लगाई जाती है। इसके अलावा बेसिक शिक्षकों की भी ड्यूटी कक्ष निरीक्षक के रूप में लगाई जाती है। शासन के संज्ञान में आया कि विगत कुछ वर्षों से कई प्रधानाचार्य केंद्र व्यवस्थापक का कार्य करने और शिक्षक कक्ष निरीक्षक का कार्य करने में आनाकानी करते हैं और फर्जी अस्वस्थता प्रमाणपत्र के सहारे चिकित्सीय अवकाश हासिल करते हैं। जिसके चलते अक्सर परीक्षा कार्य बाधित हो जाता है। शिक्षकों की इस कारगुजारी पर अंकुश लगाने के लिए परिषद ने व्यवस्था लागू की है। बीमारी के कारण अवकाश लेने से पूर्व प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को अपने स्वास्थ्य का परीक्षण कराकर मुख्य चिकित्साधिकारी से प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा। माध्यमिक शिक्षा परिषद सचिव नीना श्रीवास्तव ने डीआईओएस संत प्रकाश को शासनादेश के अनुसार ही अवकाश स्वीकृत करने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में डीआईओएस ने सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को शासनादेश से अवगत कराया है।
शासनादेश का अक्षरश: पालन किया जाएगा। मुख्य चिकित्साधिकारी के मेडिकल प्रमाण पत्र के बगैर ड्यूटी करने वाले किसी प्रधानाचार्य और शिक्षक को अवकाश नहीं दिया जाएगा।
संत प्रकाश, डीआईओएस