कहने को तो पीलीभीत रेलवे स्टेशन को आदर्श स्टेशन का दर्जा प्राप्त है, लेकिन यहां कि चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। रेलवे अस्पताल की दशा किसी से छिपी नहीं हैं। डिवीजन में कार्यरत 1400 कर्मचारी और अधिकारियों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए अस्पताल में सिर्फ एक डॉक्टर और फार्मेसिस्ट पर है। ऐसे में कई बार कर्मचारियों को गंभीर चोट लगने पर बरेली और शहर के निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
रेल कर्मचारियों को मेडिकल सुविधा देने के लिए सब डिवीजन में बनाए गए स्वास्थ्य केंद्र पूर्वोत्तर रेलवे पीलीभीत इन दिनों भयानक बीमारी से गुजर रहा है। जर्जर होते जा रहे स्वास्थ्य केंद्र पर रेल महकमा कोई ध्यान नहीं दे रहा। इस डिवीजन में 1400 अधिकारी, कर्मचारी सभी विभागों में तैनात हैं। इनके स्वास्थ्य की जिम्मेदारी जंक्शन के पास बने स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात सिर्फ एक डॉ. ऋषभ की है। जिससे अधिकांश कर्मचारियों को शहर के प्राइवेट व इज्जतनगर के अस्पताल में जाकर इलाज करना पड़ता है। सूत्रों की माने तो विभाग ने सप्ताह में एक दिन इज्जतनगर अस्पताल से डॉक्टर को भेजने की सुविधा भी की है। वह पूरे दिन के बजाय एक दो घंटा ही बैठते है।
दुर्घटना में एआरएमई की नहीं मिल सकेगी सुविधा
सब डिवीजन में मौजूद एक्सीडेंट रिलीफन मेडिका यान (एआरएमई) भी शोपीस बना हुआ है। नियमानुसार दुर्घटना के बाद अस्पताल का स्टाफ घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू करता है। बाद में गंभीर मरीजों को घटना स्थल से रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में कई दुर्घटना होने के बाद एआरएमई की सुविधा मिल जाए संभव नहीं है।
वर्जन
स्वास्थ्य केंद्र पर एक चिकित्सक डा. ऋषभ की तैनाती है। डिवीजन के कर्मचारियों को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो इस पर विशेषतौर पर ध्यान दिया जाता है। अस्पताल की सभी सुविधाएं दुरुस्त की जा रही हैं। - धमेंद्र कुमार, स्टेशन अधीक्षक