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गेहूं खरीद घोटाला: क्रय केंद्र प्रभारी को बचा ले गया प्रशासन

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गेहूं खरीद घोटाला: क्रय केंद्र प्रभारी को बचा ले गए अफसर
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क्रासर...
सवाल बरकरार: क्रय केंद्र पर आया गेहूं कैसे पहुंचा राइस मिल
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। पूूरनपुर में हुए गेहूं खरीद घोटाले में प्रशासन ने जांच कर राइस मिल मालिक, एवं पार्टनर सहित तीन पर मुकदमा दर्ज करा दिया लेकिन क्रय केंद्र प्रभारी को साफ बचा लिया जबकि अधिकतर किसानों का गेहूं क्रय केंद्र आने के बाद ही राइस मिल तक पहुंचा था। वहीं इस मामले में कई किसान लालच के वशीभूत ठगी के शिकार हो गए। इसके चलते गेहूं के अधिक दाम लगवाकर नवंबर माह के चेक लिए।
पूरनपुर क्षेत्र के गांव शिम्भुआ में एफसीआई के गेहूं क्रय केंद्र के हैंडलिंग ठेकेदार घनश्याम दीक्षित (अब मृतक) उनके पार्टनर पर किसानों का गेहूं खरीद कर निजी फर्म से भुगतान करने, कई किसानों का भुगतान न करने सहित तमाम आरोप लगे हैं। इसकी जांच में कई किसानों को दिए गए सत सांई राइस मिल के चेक डिसऑनर मिले थे जबकि कई किसानों के पास गेहूं बिक्री की सादी पर्चियां मौजूद हैं। किसानों का आरोप है कि वह अपना गेहूं क्रय केंद्र पर लेकर गए आए थे इसमें कुछ का गेहूं क्रय केंद्र पर तौला गया जबकि कुछ को राइस मिल लेकर तौल कराई गई। ऐसे मेें सवाल उठता है कि जब किसान क्रय केंद्र पर गेहूं लेकर पहुंचा तो भला ठेकेदार ने किसानों को गुमराह कैसे कर लिया। क्रय केंद्र पर पहुंचे किसानों के गेहूं की जांच और उसकी तौल की जिम्मेदारी क्रय केंद्र प्रभारी की है। कई किसानों ने अपनी शिकायत में क्रय केंद्र पर गेहूं ले जाने का दावा किया है फिर भला प्रशासन ने मामले में प्रथम दृष्टया क्रय केंद्र प्रभारी को दोषी क्यों नहीं ठहराया। चूंकि मिलीभगत के चलते एफसीआई केंद्र के अभिलेखों में उतना की गेहूं चढ़ाया गया जिसका उतार सरकार क्रय केंद्रों पर हुआ इसलिए अभिलेख दुरूस्त होना लाजमी है लेकिन क्रय केंद्र पर आया गेहूं किसी ठेकेदार या संस्था ने खरीद लिया क्या इसे रोकने की जिम्मेदारी क्रय केंद्र प्रभारी की नहीं थी।
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लालच के चलते फंस गए कई किसान
गेहूं खरीद के घोटाले में कई किसान लालच के चलते भी फंस गए। खरीदारों ने उन्हें महंगा दाम देकर कुछ माह बाद भुगतान लेने पर राजी कर लिया और सौदा तय होने पर नवंबर, दिसंबर माह की तिथि के चेक ले लिए। सूत्रों की मानें तो इसमें किसानों को 1735 के बदले 2000 रुपये तक दाम दिया गया। इस तरह खरीदे गए गेहूं को दिल्ली की फर्म के नाम बंधक बनाकर खरीदारों ने लोन ले लिया था।
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गेहूं खरीद में किसानों की शिकायत की जांच के लिए टीम बनाई गई है। फिलहाल गेहूं के गलत भंडारण और किसानों को गुमराह करने के मामले में ही रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। टीम की जांच में यदि क्रय केंद्र प्रभारी दोषी पाया जाएगा तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।- बृजकिशोर, एडीएम वित्त एवं राजस्व/ जिला खरीद अधिकारी
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गेहूं भुगतान न होने पर किसानों ने किया प्रदर्शन
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एसडीएम कार्यालय में सौंपा ज्ञापन, आरोपियों को जेल भिजवाने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
पूरनपुर। गेहूं खरीद केंद्र पर खरीदे गए गेहूं का भुगतान न होने के विरोध में किसानों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन देकर मामले में दर्ज रिपोर्ट के नामजद आरोपियों को जेल भिजवाने की मांग की।
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सरकारी गेहूं खरीद में ढ़ाई करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में क्रय केंद्र के ठेकेदार की ओर से गेहूं खरीद पर दी गई पर्चियों और चेक डिसऑनर होने पर किसान भुगतान के लिए अफसरों के चक्कर काट रहे है। मामले में कोतवाली पुलिस ने मंगलवार को विपणन निरीक्षक प्रभात कुमार की ओर से राइस मिल के मालिक समरवीर सिंह, क्रय केंद्र के ठेकेदार घनश्याम दीक्षित की विधवा सुनीता दीक्षित और मुनीम विपिन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। शुक्रवार को किसान तहसील परिसर में एकत्र हुए और गेहूं का भुगतान न मिलने के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने वालों में पुत्तूलाल, प्रगट सिंह, गुरसेवक सिंह, दिलबाग सिंह, हरनेक सिंह, निर्मल सिंह, हरविंदर सिंह आदि थे।
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