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ठंड बढ़ने के साथ बढ़ सकती बाघ हमले की घटनाएं

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अमर उजाला ब्यूरो
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पीलीभीत/माधोटांडा। पिछले एक साल में बाघ ने 19 लोगों का शिकार किया। कई लोग बाघ के हमले में घायल भी हो चुके हैं। खूनी हो चुके बाघ को खोजने के लिए वन विभाग पिछले डेढ़ माह से कड़ी मशक्कत भी कर रहा है, लेकिन वह कामयाब नहीं हो सका है। शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब बाघ जंगल से बाहर खेत, खलिहान आदि में दिखाई न देता हो। चार दिन पहले ही माधोटांडा क्षेत्र के एक फार्म हाउस तक बाघ पहुंच गया और वहां उसने गाय पर हमला कर घायल कर दिया। एक दिन पहले ही अमरिया क्षेत्र में खेत में काम कर रहे मजदूरों को बाघ दिखाई दिया। इसकी पुष्टि भी वन विभाग के लोगों ने उसके पद चिह्न से की। ठंड बढ़ने के साथ जंगल के बाहर बाघों की चहलकदमी और बढ़ जाएगी। इस माह के अंतिम सप्ताह से गन्ने की पेराई भी चीनी मिलें शुरू करने वाली हैं। ऐसे में बाघों के हमले की घटनाएं बढ़ने से इंकार नहीं किया जा सकता। वन महकमे ने इन्हें रोकने केे लिए रणनीति तैयार की है।
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जंगल से सटे किसानों का पहले आपूर्ति होगा गन्ना
वन महकमे का मानना है कि गन्ने की फसल तैयार होने एवं ठंड का मौसम शुरू होने के साथ बाघ जंगल से निकलकर मैदानी क्षेत्र की ओर रुख कर सकते हैं। इसके लिए जंगल से सटे एक किलोमीटर के दायरे वाले क्षेत्र में गन्ना किसानों की सूचियां वन महकमा बना रहा है। ताकि जिलाधिकारी शीतल वर्मा से आदेश करवा ऐसे इलाकों की पर्ची पहले जारी कराकर गन्ना कटवाया जा सके। वन महकमे का मानना है कि इससे काफी हद तक बाघों के जंगल से बाहर निकलने पर अंकुश लगेगा।
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पिछले साल बराही रेंज से हुई थी घटना की शुरूआत
पिछले साल बाघों के हमले एवं बाघों के जंगल से बाहर निकले की घटनाओं की शुरुआत बराही के जंगल से हुई थी। इसके बाद जहां वनों से सटे इलाका कराहा उठा था। वहीं पूरे वर्ष भर बाघ जंगल से बाहर निकलते रहे मानवों, पशुओं को निवाला बनाते रहे। ग्राम डगा, पिपरिया संतोष व कलीनगर क्षेत्र में बाघ ने कई लोगों को अपना निवाला बना लिया था। एक बाघ को पिंजड़े में बंद कर जंगल छोड़ा गया तो मानव की हत्याएं करने वाले दूसरे बाघ को ट्रैंक्यूलाइज कर लखनऊ चिड़िया घर भेजवा दिया था।
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ठंड बढ़ने पर जंगली सुअरों व अन्य वन्यजीवों के शिकार के लिए बाघ भी जंगल से उनके पीछे जंगल के सटे गन्ने खेतों में पहुंच जाते हैं। वहां रुकते हैं। इस बीच यदि कोई मानव मिल जाए तो उस पर भी हमला कर देते हैं। पिछले वर्ष के हमलों से सबक लेकर ही वन विभाग ने इस बार जंगल से सटे एक किमी के क्षेत्र में गन्ना किसानों की सूची तैयार करा रहा है। डीएफओ के माध्यम से यह सूची डीएम को भेज ऐसी व्यवस्था कराई जाएगी कि उन क्षेत्रों का गन्ना पहले मिलों को आपूर्ति हो जाए। जंगल से सटे इलाकों के लोग जंगल में शौच को न जाए, इसके लिए सीडीओ से उन गावं के लोगों को अनुदान दिलवा शौचालय बनवाने को भी प्रेरित किया जाएगा।
अनिल शाह, वन क्षेत्राधिकारी बराही
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