पीलीभीत। कान्हा के जन्म की खुशियां मनाने के लिए लोग तैयार हैं तो बाजार भी पूरी तरह सजा दिखाई दिया। पर्व के एक दिन पूर्व शहर के बाजार पूरी तरह से जन्माष्टमी के रंग में सराबोर दिखे। भगवान श्रीकृष्ण व राधा की खूबसूरत मूर्तियों के साथ उनके परिधान भी बाजार की खूबसूरती को चार चांद लगाते दिखे। इसके अलावा लकड़ी व मेटल के हिंडोलों के साथ पगड़ी व मुकुट भी खूब डिमांड रही।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर जिले भर में तैयारियां जोरों पर हैं। घरों व मंदिरों में नन्हें कान्हा का जन्मोत्सव मनाने को हर कोई उत्सुक दिख रहा है। इसके लिए शहर के विभिन्न बाजारों में दुकानदारों ने खास तैयारियां की है। दुकानों पर लड्डू गोपाल की प्रतिमा, पोशक, मुकुट, पालना, बांसुरी से लेकर हिंडोले तक उपलब्ध हैं। शहर के स्टेशन रोड, जेपी रोड आदि पर जन्माष्टमी की खासी धूम नजर आई। लड्डू गोपाल व राधा कृष्ण की प्रतिमाओं की मथुरा व राजस्थान से आई पोशाकों की सबसे ज्यादा डिमांड देखी गई। इन पोशाकों की कीमत 20 रुपये से लेकर तीन हजार रुपये हैं। कान्हा की पगड़ी, बांसुरी, मुकुट, कंगन, मोरपंख आदि की भी जमकर बिक्री हई। बाजार में हर शेप व साइज में लड्डू गोपाल, भगवान कृष्ण व राधा की मूर्तियां भी लोगों को खूब लुभा रही है। स्टोन व मेटल की बनी मूर्तियां की खासी डिमांड देखी जा रही है। इन मूर्तियों की कीमत 80 रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक देखी गई। बाजार में खासकर महिलाएं भगवान के कपड़े व झूले ज्यादा खरीद रही है। इधर व्यापारी शांतम देव समेत अन्य व्यापारियों का कहना है कि इस बार बाजार में हर सामान की कीमत में थोड़ा बहुत इजाफा हुआ है। इसके बावजूद बाजार में खरीदारों की संख्या में कोई गिरावट नहीं आई है।
इस बार झूले के साथ सोफा सेट पर विराजेंगे लड्डू गोपाल
बाजार में इस बार लड्डूगोपाल, भगवान श्रीकृष्ण व राधा को विराजमान करने के लिए लकड़ी, मेटल के अलावा सोफा सेट भी उतारे गए हैं। दुकानदारों के मुताबिक बाजार में इनकी कीमत 30 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक है।
इस बार दो दिन मनाया जाएगा जन्माष्टमी
ज्योतिषाचार्य नारायण स्वष्रूप शर्मा के मुताबिक इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व दो दिन मनाया जाएगा। सोमवार यानि 14 अगस्त को पूरे दिन सप्तमी तिथि रहेगी। सायं 7.47 बजे से अष्टमी आ जाएगी। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी में आधी रात को हुआ था। मंगलवार यानि 15 अगस्त को अष्टमी तिथि केवल सायं 5.41 बजे तक ही रहेगी। बाद नवमी तिथि आ जाएगी। रात्रि 4.31 बजे तक कृतिका नक्षत्र ही रहेगा। बताया कि इस तरह परिवारीजनों के लिए सोमवार को जन्माष्टमी पर्व मनाना श्रेष्ठ रहेगा। जबकि वैष्णव संतों/मंदिरों में मंगलवार को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।