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बिना चर्चा के 250 करोड़ की जिला योजना स्वीकृत

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पीलीभीत। जिले में साल भर होने वाले विकास कार्यों पर चर्चा की औपचारिकता निभाकर 250 करोड़ की जिला योजना स्वीकृत कर दी गई। इसमें सबसे ज्यादा 61 करोड़ रुपये रोजगार सृजन के लिए खर्ज किए जाएंगे। करीब दो घंटे चली बैठक में कानून व्यवस्था, स्थानीय मुद्दे और छुटभैयों की समस्याओं पर चर्चा होती रही। पार्टी के अन्य सदस्यों को बोलने का मौका तक नहीं दिया गया।
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प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद जिला योजना की पहली बैठक बुधवार को कलेक्ट्रेट स्थित गांधी सभागार में हुई। बैठक में पहुंचे प्रभारी मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा, विधायक संजय गंगवार, किशनलाल राजपूत, बाबूराम पासवान, रामसरन वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेश गंगवार पहुंचे। बैठक में भीड़ देख डीएम ने अनाधिकृत लोगों के बाहर जाने को कहा। मगर जनप्रतिनिधियों के साथ पहुंचे लोगों ने डीएम की बात को अनसुना कर दिया। इससे डीएम ने बैठक की कार्रवाई प्रारंभ की। मगर कार्रवाई शुरू होते ही विधायकों ने जिले में बिगड़ती कानून व्यवस्था का मुद्दा उठा दिया। फिर तो पौन घंटे तक कानून व्यवस्था पर ही चर्चा होती रही। एसपी देवरंजन वर्मा ने जिले में शुरू किए पर्ची सिस्टम के बारे में बताना चाहा, लेकिन उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं था। इसके बाद विधायकों ने डीएम पर चीनी मिलों की पक्षधर होने का आरोप लगाते हुए प्रदूषण की समस्या रखी। जिला पंचायत सदस्य रियाज खान ने अमरिया तहसील बनने पर वहां मंडी समिति का निर्माण कराने की मांग रखी।
इन पर चर्चाओं के बाद डीएम ने जिले की विकास योजनाओं के लिए बनी बुकलेट पढ़ना शुरू की। इस पर सभी ने मेज थपथपाकर 250 करोड़ की योजनाओं को स्वीकृति प्रदान कर दी। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र, एडीएम अजयकांत सैनी, सीडीओ इंद्रदेव द्विवेदी, डीएसटीओ तिलक सिंह सहित कई अधिकारी एवं योजना समिति के सदस्य मौजूद रहे।
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किस मद में कितना होगा खर्च
250 करोड़ की प्रस्तावित जिला योजना में सर्वाधिक 61 करोड़ का बजट रोजगार कार्यक्रमों के लिए रखा गया है। जबकि कृषि के लिए 22 लाख, गन्ना विकास के लिए 6.23 करोड़, सड़क एवं पुल निर्माण के लिए 22 करोड़, प्राथमिक शिक्षा को नौ करोड़, एलोपैथिक चिकित्सक पर 10 करोड़, स्वच्छता कार्यक्रम को 30 करोड़, ग्रामीण आवास को 24.48 करोड़ और समाज कल्याण को 48.06 करोड़ का प्रस्ताव रखा गया है।

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बनती है योजना नहीं मिलता बजट
जिले के विकास का सब्जबाग दिखाकर हर साल अरबों रुपये की योजनाओं का प्रस्ताव जिला योजना की बैठक में किया जाता है। बैठक में मंत्री, विधायक इसके लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराने के दावे भी ठोंकते हैं लेकिन बजट आवंटित कराने में छक्के छूट जाते हैं। गत वर्ष भी 250 करोड़ की योजना प्रस्तावित की गई थी जिसके सापेक्ष मात्र 60 करोड़ रुपये ही जिले को प्राप्त हुआ।


जब मंत्री को झेलनी पड़ी फजीहत
जिला योजना की बैठक प्रारंभ होने पर अनाधिकृत लोगों के साथ पत्रकारों को भी बाहर कर दिया गया। बैठक समाप्त होने पर प्रभारी मंत्री बाहर आए और मीडिया कर्मियों को देख पुन: हाल में पहुंचकर पत्रकार वार्ता की इच्छा व्यक्त की लेकिन पत्रकारों वार्ता से इंकार कर दिया। इस पर प्रभारी मंत्री मायूस होकर रवाना हो गए।

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तहसील के विरोध में मिले वकील
जिला संयुक्त बार एसोसिएशन के अध्यक्ष किशननलाल, उपाध्यक्ष धीरेंद्र मिश्र और सचिव महेश चंद्र शर्मा ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रभारी मंत्री को देकर अमरिया और कलीनगर तहसील समाप्त करने की मांग की। कहा कि पिछली सरकार में वोटों के लालच में मानकों के विपरीत बिना किसी सुविधाओं के तहसीलों की घोषणा कर दी गई जिन्हें समाप्त किया जाना चाहिए।
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