पीलीभीत/बिलसंडा।
अविश्वास प्रस्ताव केे इम्तिहान में मरौरी ब्लॉक प्रमुख अरुण वर्मा अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। विरोधी खेमा कोरम के लिए जरूरी 53 सदस्यों को भी नहीं जुटा सका। ऐेसे में दो मजों से उनकेे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास नहीं हो सका लेकिन बिलसंडा में 95 के सापेक्ष 55 मत अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में पड़े। इससे यहां की ब्लॉक प्रमुख सुमन यादव को कुर्सी गवानी पड़ी।
मरौरी ब्लॉक प्रमुख अरुण वर्मा के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव पर सोमवार को नेहरू पार्क के सामने स्थित ब्लॉक परिसर में बैठक की प्रक्रिया शुरू की गई। यहां बैठक की कार्रवाई के लिए 105 के सापेक्ष 53 सदस्यों की जरूरत थी। इसके लिए सुबह 10 बजे से 12 बजे तक समय रखा गया था। अविश्वास प्रस्ताव पेश करने वाले खेमे के लोग बमुश्किल 51 सदस्य ही जुटा पाए। निर्धारित समय तक कोरम पूरा न होने पर पीठासीन अधिकारी/एसडीएम सदर पूर्णिमा सिंह ने कार्रवाई को निरस्त कर दिया। इस तरह ब्लॉक प्रमुख अरुण वर्मा अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। इस मौके पर बीडीओ, डीसी मनरेगा मृणाल सिंह, एडीओ पंचायत पवन शुक्ला सहित कई अधिकारी कर्मचारी थे। वहीं सीओ सिटी धर्मसिंह मार्छाल के नेतृत्व में कोतवाल एसके सिंह, मोहम्मद कासिम सहित भारी पुलिस फोर्स तैनात रहा। वहीं, अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही ब्लॉक प्रमुख अरुण वर्मा भी पहुंच गए और 12 बजे ब्लॉक के गेट पर ही बैठ कर स्थिति का जायजा लेते रहे। 12 बजे कोरम पूरा न होने पर समर्थकों ने फूल मालाएं पहना कर उनका स्वागत किया। इसके बाद समर्थकों ने पूर्व मंत्री के गोदावरी स्थित आवास पहुंचकर फूलमालाएं पहनाकर बधाई दी।
उधर बिलसंडा में ब्लॉक प्रमुख सुमन यादव के खिलाफ प्रस्तुत अविश्वास पर चर्चा और मतदान के लिए पीठासीन अधिकारी के रूप मेें एसडीएम बीसलपुर की मौजूदगी में प्रक्रिया शुरू हुई। यहां कुल 95 सदस्यों के सापेक्ष 59 सदस्य बैठक में उपस्थित हुए। कोरम पूरा होने पर एसडीएम के निर्देश पर बैठक के बाद मतदान शुरू हुआ। सभी 59 सदस्यों ने मतदान किया। शाम पांच बजे से मतगणना हुई। इसमें अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष मे 55 मत पड़े जबकि तीन निरस्त हो गए और एक सदस्य ने नोटा (इनमें से कोई नहीं) का इस्तेमाल किया। इस तरह 95 के सापेक्ष 55 मत पक्ष में पडने से एसडीएम ने प्रस्ताव को पास घोषित किया। अविश्वास प्रस्ताव पास होने से सुमन यादव को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। इस ब्लॉक में अब नए प्रमुख का चुनाव होगा।
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इंसेट...
पूर्व विधायक पीतमराम के बाद पूर्व मंत्री हेमराज की बची साख
क्रासर...
भाजपा को लगा करारा झटका
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
मरौरी ब्लॉक प्रमुख अरुण वर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश होने से सपा के साथ-साथ पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा की साख भी दांव पर लगी थी। कुर्सी सलामत रख अरुण वर्मा ने खुद के साथ अपने भाई हेमराज की साख को भी बनाए रखा। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद यह दूसरा ऐसा मौका है जब सपा ने यहां भाजपा को करारा झटका दिया है। इससे पहले पूर्व विधायक पीतमराम की पुत्र वधू एवं जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र ने भी अपने खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव को गिरा कर अपने साथ-साथ अपने ससुर पीतमराम की प्रतिष्ठा भी बचाई थी।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद जिला और क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का अभियान शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर की गई थी, लेकिन भाजपा को इस पहले प्रयास में ही मुंह की खानी पड़ी थी। आरती अपनी सीट बचाने में कामयाब रहीं। इसके बाद भाजपा अमरिया और पूरनपुर के सपा समर्थित ब्लॉक प्रमुखों के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को पास कराने में जरूर कामयाब हो गई। इन दो प्रस्तावों में मिली सफलता के बाद से भाजपा समर्थित सदस्यों का हौसला बढ़ गया और मरौरी व बिलसंडा ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया। इसमें मरौरी ब्लॉक अरुण वर्मा के साथ उनके भाई पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा की इज्जत भी दांव पर लगी थी। अरुण वर्मा के खिलाफ अविश्वास गिरने से भाजपा समर्थित सदस्यों को खासा झटका लगा है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा को इसके आसार कुछ दिन पहले ही नजर आ गए थे और इसी के चलते भाजपा खुद को इन अविश्वास प्रस्तावों से दूर बताने लगी थी।