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Pilibhit News: 10 हजार किसानों ने छोड़ी गन्ने की खेती

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अमर सिंह।
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बीसलपुर। इस गन्ना समिति क्षेत्र के लगभग 10 हजार किसानों ने विभिन्न प्रकार की विसंगतियों के चलते इस वर्ष गन्ने की खेती छोड़ दी है। इन किसानों ने दूसरी फसलों की खेती करनी शुरू कर दी है।
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सहकारी गन्ना विकास समिति क्षेत्र के अभिलेखों के अनुसार यहां सदस्य तो लगभग 94 हजार हैं लेकिन गन्ना आपूर्ति कर्ता केवल 60 हजार किसान ही हैं। इन 60 हजार किसानों ने पिछले सत्र में समिति के माध्यम से क्षेत्रीय चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति किया था। पिछले माह जब किसानों के खेतों में खड़े गन्ने का पर्यवेक्षकों की ओर से सर्वेक्षण कराया गया तो पता चला कि समिति क्षेत्र में केवल 50 हजार किसानों ने ही गन्ने की खेती की है।
10 हजार किसानों ने गन्ने की खेती के स्थान पर धान की खेती की है। पर्यवेक्षकों की ओर से पूछने पर गन्ने की खेती न करने वाले किसानों ने विभिन्न प्रकार की परेशानियां बताईं। गन्ने की खेती छोड़ने वालों में सर्वाधिक किसान बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल की बरखेड़ा और मकसूदापुर इकाइयों से जुड़े हुए हैं। (संवाद)
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ये बताईं दिक्कतें

सट्टे बनने, पर्चियां प्राप्त होने, बैंक खाता खुलवाने, आधार कार्ड बनवाने, त्रुटिपूर्ण आधार कार्ड संशोधित कराने, समिति सदस्य बनने, घोषणा पत्र भरने, धोखे से दूसरे के बैंक खाते में चले जाने वाले गन्ना मूल्य भुगतान को अपने खाते में वापस लाने में दिक्कत होने, गन्ना विभाग के अधिकारियों के कार्यालय में नियमित रूप से न बैठने, गन्ने की ओवरलोड ट्राॅलियों को पुलिस की ओर से पकड़े जाने, मिल गेट स्थित क्रय केंद्रों पर गन्ना तौलवाने के लिए कई-कई दिन डेरा डालने, क्रय केंद्रों पर मानक के अनुरूप सुविधाएं न होने, चीनी मिलों से समय पर उन्नतशील प्रजाति का गन्ना बीज न मिलने, चीनी मिलों से समय से भुगतान न मिलने, लंबित गन्ना मूल्य भुगतान पर ब्याज न मिलने, गन्ने की खेती से संबंधित समस्याओं का समय पर निस्तारण न होने, क्रय केंद्रों पर गन्ने की घटतौली होने, गन्ना विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा अपेक्षित सहयोग न दिए जाने, अतिरिक्त बांड समय से न भर पाने, अतिरिक्त पर्चियां लगवाने के लिए पर्यवेक्षकों द्वारा सुविधा शुल्क मांगने, गन्ना विभाग के गोदामों पर समय पर खाद न मिलने, गन्ना विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा किसानों से अभद्र व्यवहार करने आदि समस्याओं का किसानों ने गन्ने की खेती छोड़ने के पीछे हवाला दिया है।


इन स्थानों के किसानों ने छोड़ी गन्ने की खेती

बीसलपुर नगर, बिलसंडा कस्बा, बरखेड़ा कस्बा, टिकरी, मधवापुर, मसीत, रंभोजा, पैनिया हिम्मत, मुड़िया बिलहरा, बमरोली, भीकमपुर, बहादुर पुर, नवादा महेश, मुड़िया कुंडरी, नरायनपुर, जोगीठेर, ज्योरह कल्याणपुर, ईंटगांव, कनपरा, दौलतपुर पट्टी, बैरा, भदेंगकंजा, रसायाखानपुर, चुर्रासकतपुर, पुरैनिया रामगुलाम और साबेपुर।


किसानों ने कहा
जमीन नगर क्षेत्र में है। पिछले कई वर्षों से गन्ने की खेती कर रहा था। गन्ने का भुगतान समय पर न मिलने के कारण इस वर्ष गन्ने की खेती छोड़ दी है। उसके स्थान पर अब धान और गेहूं की खेती करेंगे।
- अमर सिंह राजपूत कृषक, मोहल्ला दुबे


पिछले कई दशकों से गन्ने की खेती कर रहा था। गन्ना विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से अपेक्षित सहयोग न दिए जाने से परेशान होकर इस वर्ष गन्ने की खेती छोड़ दी है। अब मैंने धान और गेहूं की खेती करने की योजना बनाई है।
-रामप्रकाश शर्मा कृषक, गांव अदिलाबाद

गन्ना सर्वे रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ है कि इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में 10 हजार किसानों ने गन्ने की खेती छोड़ी है। उन किसानों को गन्ने की खेती करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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-मनोज साहू, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक

अमर सिंह।

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