सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने कहा कि मुजफ्फरनगर में दंगा नहीं बल्कि जातीय संघर्ष हुआ है।
इस मामले में उन्होंने अखिलेश सरकार की कार्रवाई का समर्थन करते हुए घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।
आगरा में सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि देश की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पर चिंतन के बाद प्रस्ताव पेश किए जाएंगे।
मुजफ्फरनगर में हिंसा पर काबू करने में अखिलेश सरकार की भूमिका पर उठे सवालों का उन्होंने सीधा जवाब तो नहीं दिया पर ये कहा कि यह घटना भविष्य के लिए सबक है।
प्रदेश सरकार की पीठ ठोकते हुए उन्होंने कहा कि सख्ती से सरकार ने इस पर पर जल्द ही काबू कर लिया। हालांकि 36 लोगों की मौत कम नहीं होती। यह दुखदायी है।
उन्होंने इस मामले में मीडिया से भी संजीदगी और सहयोगात्मक रुख रखने की अपील की। पूरे मसले पर विपक्षी दल के नेताओं की भूमिका पर उठ रहे सवाल पर कहा कि आयोग का गठन कर दिया गया है और जिस किसी की भूमिका इसमें सामने आएगी उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
मुजफ्फरनगर कांड के बाद केंद्र को राज्यपाल की रिपोर्ट पर उन्होंने कहा यह रूटीन है। राज्यपाल को लगातार केंद्र को रिपोर्ट भेजनी पड़ती है।
‘मैं पीएम की रेस में नहीं’
सपा सुप्रीमो ने कहा है कि वह पीएम पद की रेस में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव चाहे जब हों अगली सरकार तीसरे मोर्चे की ही बनेगी, लेकिन मोर्चा चुनाव के बाद ही बनेगा।
उन्होंने साफ किया कि तीसरा मोर्चा चुनाव से पहले इसलिए नहीं बन सकता क्योंकि सभी दल सीटों के बंटवारे को लेकर सहमत नहीं हो सकते। इसलिए समान विचारधारा वाले दल चुनाव के बाद मिल बैठकर अगली सरकार की रूपरेखा तय करेंगे।
समय से पहले लोकसभा चुनाव के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार पर निर्भर है। वैसे समाजवादी पार्टी इसके लिए अभी से तैयार हैं। उन्होंने खुद को पीएम का उम्मीदवार मानने से भी इनकार कर दिया। मोदी के पीएम की उम्मीदवारी के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे।