अब इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे जूनियर्स को उनके सीनियर भी पढ़ाएंगे। किसी भी विषय में कमजोर छात्रों को उनके सीनियर क्लास देंगे।
यह महज औपचारिकता नहीं होगी बल्कि इस योजना को गंभीरता से लागू करने के लिए सीनियर्स को पेमेंट भी किया जाएगा। इससे जूनियर-सीनियर दोनों का फायदा होगा।
गौतमबुद्ध टेक्निकल यूनिवर्सिटी (जीबीटीयू) प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों के सामने यह नई पहल शुरू करने जा रही है।
इसकी शुरुआत यूनिवर्सिटी के कॉन्सटीट्यूएंट इंस्टीट्यूट (संघटक कॉलेज) से होगी। इसके बाद प्रदेश के प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
निजी तकनीकी कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी है, जिसके कारण कमजोर छात्रों पर कम फोकस होता है और रिजल्ट पिछड़ रहा है।
यूनिवर्सिटी की इस कोशिश के बाद निजी कॉलेजों के लिए एक नया विकल्प बनेगा। दरअसल, जीबीटीयू ने एजुकेशन सिस्टम को डीसेंट्रलाइज (विकेंद्रीकृत) करने के लिए कई नई योजनाएं बनाई हैं, जिनमें से बीओएस भी एक है।
बीओएस में होंगे छात्र
जीबीटीयू ने निजी इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर और मैनेजमेंट समेत सभी कॉलेजों में बोर्ड ऑफ स्टडीज (बीओएस) बनाने के निर्देश दिए हैं।
सिलेबस तैयार करने में इन बीओएस की राय ली जाएगी। खास बात ये है कि फाइनल ईयर का एक टॉपर स्टूडेंट भी बीओएस का हिस्सा होगा, ताकि सिलेबस के बदलाव में छात्रों की सोच और उनकी प्रतिक्रियाओं को भी शामिल किया जा सके।