नोएडा में कालिंदी कुंज मेट्रो परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार के पास अटकी हुई है। नोएडा प्राधिकरण और दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) के बीच करार पर शासन की मंजूरी मिलनी है।
दरअसल, निर्माण की शर्तों को तय करते हुए डीएमआरसी से तैयार एमओयू शासन के पास 5 जून को भेजा गया था, लेकिन इसकी कुछ शर्तों पर आपत्ति के चलते इसे वापस कर दिया गया।
नोएडा प्राधिकरण और डीएमआरसी के बीच बैठकें हुईं, जिसमें एमओयू में संशोधन करते हुए फाइनल ड्राफ्ट 9 सितंबर को फिर से शासन के पास भेजा गया और तभी से यह शासन के पास है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही काम शुरू हो सकेगा।
इसके साथ ही कालिंदी कुंज मेट्रो के निर्माण पर आने वाले कुल खर्च में से 20 फीसदी भारत सरकार को वहन करना है, इस कारण एमओयू पर वहां से भी अप्रूवल मिलना बाकी है।
प्राधिकरण अधिकारी इस महीने के अंत तक अप्रूवल मिलने की उम्मीद जता रहे हैं, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। 3.96 किलोमीटर लंबे रूट को पूरा करने में 845 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
दिल्ली ने अपने क्षेत्र में पहले ही काम शुरू कर दिया था, लेकिन मानसून आ जाने पर काम रुक गया। अब चुनाव के बाद फिर से काम शुरू होगा। बता दें कि ये रूट बॉटेनिकल गार्डेन से जुड़ेगा।
मौजूदा स्टेशन के अलावा वहीं पर एक और स्टेशन बनाया जाएगा। कनैक्टिंग स्टेशन होने के कारण ही यहां पर मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण प्रस्तावित किया गया है, ताकि यहां आने वाले वाहनों को पार्किंग की किल्लत न झेलनी पड़े।
वहीं, प्राधिकरण की मानें, तो कालिंदी कुंज के पास जमीन देने के लिए सिंचाई विभाग भी तैयार है। ऐसे में देरी सिर्फ उत्तर प्रदेश शासन और भारत सरकार की अनुमति के चलते हो रही है।
नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण भी नए साल से इस रूट का निर्माण शुरू होने की उम्मीद जता रहे हैं।
इसके बनने से नोएडा और दिल्ली के बीच मेट्रो की एक और कनैक्टिविटी हो जाएगी, जिससे दक्षिण दिल्ली और नोएडा के बीच रोजाना सफर करने वाले लोगों को राहत मिलेगा।