नोएडा में अभी तक बाजार जाने पर गाड़ी खड़ी करने के लिए पैसे चुकाने पड़ते थे, लेकिन अब तो ऑफिस के बाहर जबरन पार्किंग लगा दी गई है।
पार्किंग के नाम पर रोजाना दस से तीस रुपये प्रति गाड़ी या फिर महीने के 3500 रुपये वसूल किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं शहर की अधिकांश सड़कें और ग्रीन बेल्ट पर पार्किंग माफियाओं का कब्जा हो चुका है।
शहर के व्यावसायिक क्षेत्रों में अभी तक पार्किंग वसूली होती थी, लेकिन अब इनका दायरा संस्थागत से औद्योगिक सेक्टरों तक पहुंच चुका है।
सेक्टर-57, 58, 59, 62, 63, 64 और 65 में जगह-जगह पार्किंग के नाम पर वसूली की जा रही है। इसका उद्यमियों से लेकर संस्थागत क्षेत्र के आवंटियों ने विरोध किया, लेकिन उल्टे पांव वापस होना पड़ा।
3500 रुपये की वसूली कौन करवा रहा है और इसका आधार क्या है, यह जानकारी किसी के पास नहीं है। नोएडा के दस्तावेज में शहर में करीब 32 वैध पार्किंग हैं, जबकि अन्य सभी अवैध हैं।
डीसीईओ से की शिकायत
उद्यमियों ने अवैध पार्किंग के खिलाफ डीसीईओ विजय यादव से लिखित शिकायत की है। उद्यमी संगठन एनईए के महासचिव वीके सेठ का कहना है कि कई शिकायत हो चुकी हैं, लेकिन कोई हल नहीं मिला। पार्किंग के नाम पर आम आदमी का शोषण हो रहा है।
पैसे दो नहीं तो....
उद्यमी हरीश जुनेजा और कमल कुमार का कहना है कि पार्किंग की पर्ची नहीं लेने पर गाड़ी गायब होने की धमकी दी जाती है।
इसकी शिकायत पुलिस से की गई तो पार्किंग माफियाओं ने पर्ची काटने वाले उस गुर्गे को कहीं और काम पर लगा दिया और उसकी जगह दूसरा आदमी खड़ा हो जाता है।
आवंटन पर दिया अतिरिक्त शुल्क
उद्यमियों ने बताया कि ग्रीन बेल्ट की फेसिंग का प्लॉट लेते समय प्राधिकरण दो से ढाई प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लेता है। एक बार पैसे देने के बावजूद ग्रीन बेल्ट को समाप्त करके पार्किंग हो रही है, इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।