कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय...छठ मइया का गीत गाते हुए शुक्रवार को व्रती घाट तक पहुंचे। उन्होंने घाट पर अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को पहला अर्घ्य दिया।
घाट पर सूर्य भगवान व छठ मइया की पूजा-अर्चना के बाद व्रती अपने-अपने घरों को लौट गए। अब शनिवार सुबह सभी व्रती फिर घाट पर पहुंचेंगे और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगे।
शुक्रवार शाम जब छठ व्रती अपने-अपने घरों से छठ मइया के गीत गाते हुए निकले तो शहर का माहौल छठमय हो गया। परिवार का एक सदस्य सिर पर दउरा लिए हुए आगे-आगे चल रहा था।
वहीं बाकी व्रती महिलाएं नाक तक सिंदूर लगाए पीछे-पीछे छठ घाट की ओर बढ़ीं जा रही थीं। उनके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।
केलवा जे फरेला घवद से..., सेविले चरन तोहार हे छठी मइया, महिमा तोहर अपार...,चार कोना के पोखरवा...,हम करेली छठ बरतिया से उनखे लागी...आदि गीत गाते हुए महिलाएं चल रहीं थीं। लोग कार, जीप, मिनी ट्रक, ट्रैक्टर, ऑटो आदि से घाट तक पहुंचे।
कालिंदी कुंज, सेक्टर-21ए नोएडा स्टेडियम के चारों ओर, सेक्टर-19 श्री सनातन धर्म मंदिर, सेक्टर-71 शिवशक्ति अपार्टमेंट का पार्क, सेक्टर-62, 82, 5, 53, 34 सहित पूरे शहर की सड़कें बिहार व पूर्वांचल की संस्कृति से रंगी हुई दिखीं।
छठ घाट पर भी मेले जैसा माहौल था। व्रतियों ने यमुना नदी, कृत्रिम कुंडों व सरोवरों में सूर्य को पहला अर्घ्य दिया।
भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद कहीं-कहीं कुछ श्रद्धालु घाट के पास बने टेंटों में रुक गए, जो उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही घरों को लौटेंगे। शनिवार सुबह भगवान भास्कर को दूसरा अर्घ्य देने के साथ ही छठ व्रत संपन्न हो जाएगा।