विदेशी मुद्रा की तरह भारतीय करेंसी को साफ सुथरा करने की मुहिम पर खुद बैंक पलीता लगा रहे हैं। आरबीआई की ओर से क्लीन नोट पॉलिसी लागू करने के बावजूद एटीएम से ग्राहकों को गंदे और लिखावट वाले नोट मिल रहे हैं।
दरअसल, क्लीन नोट पॉलिसी के तहत आरबीआई ने 10 मई और 14 अगस्त 2013 को बैंकों को निर्देश दिए था, जिसके तहत बैंकों से ग्राहकों को लिखावट वाले और गंदे नोट देने से सख्त मना किया गया।
आदेश के मुताबिक बैंकों ने ग्राहकों को ऐसी करेंसी देना बंद कर दिया है लेकिन एटीएम से अभी भी लिखावट वाले और कटे-फटे नोट भी निकल रहे हैं।
सेक्टर-25 निवासी शुभम चौधरी ने बताया कि एटीएम से पैसे निकालते समय हर बार एक-दो नोट इस तरह का जरूर निकलता है।
दूसरी ओर, एटीएम में कैश रखवाने की जिम्मेदारी संबंधित बैंक की होती है। इसका मतलब बैंक खुद लिखावट वाले नोट एटीएम में रखने के लिए दे रहे हैं।
खास बात ये है कि जिन एटीएम से गंदे नोट निकल रहे हैं वो शाखाओं से जुड़े हुए नहीं हैं बल्कि ऑफ साइट हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बैंक क्लीन नोट पॉलिसी को लेकर गंभीर नहीं है?
मालूम हो कि आरबीआई ने सभी बैंकों को निर्देश दिए हैं कि नोट पर किसी भी प्रकार की लिखावट न करें और बैंक में ऐसे नोट आने पर उनके बदले में ग्राहकों को साफ सुथरे नोट दिए जाएं। लिखावट या गंदे नोटों को वापस आरबीआई भेजा जाए।