कुछ लोग भले ही धर्म के नाम पर एक-दूसरे का खून बहा रहे हों लेकिन यहां की रामलीला में किसी न किसी रूप में शामिल होकर कई मुसलमान कलाकार वर्षों से सद्भावना और भाईचारे का संदेश दे रहे हैं।
कहीं बशीर अहमद खां की आवाज में चौपाइयां गूंजती हैं तो कहीं इमरान खां स्पेशल इफैक्ट के जरिये मंच को जीवंत करते हैं।
तीन साल से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ का पुतला बनाने वाले हारुन कहते हैं कि हिंदू और मुसलमानों में सद्भावना और भाईचारा बनी रहे इसीलिए वे बिना किसी हिचक के काम करते हैं।
उनका कहना है कि दोनों बेशक अलग धर्म हैं लेकिन हमारा खून एक ही है। रामलीला महोत्सव का मुसलमान भाई भी इंतजार करते हैं। एक महीने पहले से कई कलाकार हिंदू भाइयों के साथ मिलकर तैयारियों में जुटे हुए हैं।
दिल्ली में वर्ष 2004 में सर्वश्रेष्ठ रामलीला का पुरस्कार जीत चुके निर्देशक गोस्वामी सुशील जी महाराज की देखरेख में अल्फा-दो स्थित श्री धार्मिक रामलीला कमेटी की ओर से रामलीला का आयोजन किया जा रहा है।
अल्फा-दो कमर्शियल बेल्ट में आठवीं बार आयोजित हो रहे दशहरा महोत्सव में करीब 75 कलाकारों में करीब 24 मुसलमान कलाकार भी भूमिका अदा करते हैं।
दिल्ली के भारतीय कला केंद्र से जुड़े रहे और रामलीला कमेटी में वर्षों से चौपाई गाने वाले बशीर अहमद खां अब भले ही इस दुनिया में न हों लेकिन अब भी रामलीला में उन्हीं की आवाज में चौपाई सुनाई देती हैं।
वहीं जोधपुर के रहने वाले इमरान खां वर्षों से मंच पर स्पेशल इफैक्ट देने का काम कर रहे हैं। रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण का तीन साल से हारुन पुतला बना रहे हैं।
रामलीला में नृत्य करने वाले बीकानेर निवासी राज रहीम कई भी साल से जुडे़ हैं। जबकि कासना निवासी कारपेंटर मुंशी खान और अहमद निसार पहली बार रामलीला मंचन के लिए सेट बनाने का काम कर रहे हैं।