नोएडा। जिले में अवैध खनन रोकने के लिए शासन के सख्त निर्देश पहली बार मई में मिले थे। लखनऊ में होने वाली समीक्षा बैठक से लौटने के बाद डीएम ने जिले के सभी प्रशासनिक अधिकारियों को अवैध खनन रोकने के आदेश दिए। इसके बाद भी अवैध खनन न रुक पाने पर जिले के वैध खनन ठेकेदार नेशनल सैंड सप्लाई कंपनी के मालिक ने शासन में अवैध खनन न रुक पाने की शिकायतें की थीं। लखनऊ से मई में तीन सदस्यीय खनन अधिकारियों की टीम नोएडा आई। इस टीम के साथ एसडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट ने नोएडा व ग्रेटर नोएडा में ताबड़तोड़ छापेमारी कर अस्सी से ज्यादा डंपर और ट्रैक्टर ट्राली जब्त किए थे। अकेले कासना थाने के अंतर्गत ही पचास से ज्यादा वाहन सीज हुए। कार्रवाई में जब्त की गई बालू की नीलामी जून में हुई, जिसमें मंत्री के खास ठेकेदार ने हिस्सा लिया और ऊंची बोली लगा कर मुकर गया। उसके खिलाफ सूरजपुर थाने में एफआईआर तक दर्ज हुई थी। इस दौरान जिले के खनन अधिकारी पर भी माफियाओं से सांठगांठ के आरोप लगने शुरू हुए। खनन अधिकारी पर बेसमेंट खुदाई करने वाले ठेकेदारों से मिलीभगत और वैध ठेकेदारों को खनन माफियाओं के इशारे पर जिले के अधिकारियों को गुमराह कर परेशान करने के आरोप भी लगे। शासन में लगातार शिकायतें पहुंचीं। इस पर खनन अधिकारी का तबादला कर दिया। अधिकारी के तबादले के कुछ दिन बाद ही एसडीएम दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन हो गया। अब जिले में अवैध खनन माफियाओं के साम्राज्य की नींव हिलनी शुरू हुई है। सत्ताधारी नेताओं और खनन माफियाओं का गठजोड़ सामने आ गया, जिसने सपा सरकार को कटघरे में ला खड़ा किया है।