नोएडा के जिला अस्पताल में बुधवार को 60 मरीजों के एलाइजा सैंपल टेस्ट के बाद उनमें से 33 मरीजों में डेंगू की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग के क्रियाकलापों पर प्रश्न चिह्न लग गया है।
इससे पहले जिला अस्पताल में रैपिड कार्ड रीडर पर 41 मरीजों में डेंगू की पुष्टि को जिला स्वास्थ्य विभाग ने नकार कर एलाइजा सैंपल टेस्ट कराने के आदेश दिए थे।
जिले के निजी और सरकारी अस्पतालों में हजारों की संख्या में भर्ती मरीज, एक्यूट वायरल सिंड्रोम और संभावित डेंगू से मौतें, हजार के ऊपर संभावित डेंगू के मरीजों के सैंपल एनसीडीसी भेजे जा चुके हैं।
फिर भी स्वास्थ्य विभाग के कानों पर जूं नहीं रेंग रही। जिला अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट डॉ. आरएल लवानिया ने बताया कि, एलाइजा पर एंटीजेन और एंटीबॉडी की जांच में 60 में से 33 मरीजों में डेंगू के वायरस की पुष्टि हुई है।
वहीं, अस्पताल में अब भी 100 से अधिक डेंगू के संभावित मरीज भर्ती हैं। इमरजेंसी वार्ड के छह बेड पर 15 रोगी भर्ती हैं। वहीं, जनरल वार्ड में 55 मरीज वायरल सिंड्रोम से पीड़ित हैं।
अब शुरू होगी फॉगिंग!
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके गर्ग ने बताया कि, डेंगू के 33 मामलों की जानकारी मिलने के बाद बृहस्पतिवार को डीएमओ के जरिये अस्पताल से मरीजों के नाम और पते की लिस्ट ली जाएगी।
इसके बाद इनके निवास के आसपास फॉगिंग कराई जाएगी।
प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था नहीं
जिला अस्पताल में डीएचएफ (डेंगू हैमरेज फीवर या शॉक सिंड्रोम) के गंभीर मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे मरीजों को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
उधर, निजी अस्पतालों में प्लेटलेट्स की जबरदस्त शार्टेज चल रही है। खासकर निगेटिव ब्लड ग्रुप के मरीजों के परिजनों को प्लेटलेट्स के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
कैलाश और मेट्रो अस्पताल के ब्लड बैंक में निगेटिव ब्लड ग्रुप की प्लेटलेट्स की काफी कमी है।
दो मरीजों की हो चुकी मौत
सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल में इस सीजन में एक्यूट वायरल सिंड्रोम से पीड़ित करीब 378 मरीज आए। इनमें से दो मरीजों की मौत हो चुकी है।
इनमें से संभावित डेंगू के मरीजों के सैंपल स्वास्थ्य विभाग और एनसीडीसी भेजे गए हैं।